जीना सिखा देंगी ये 9 प्रेरणा भरी कहानियाँ |

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जिंदगी संघर्षों से भरी हुयी है मगर जिसे इस जिंदगी को जीने का तरीका आ गया समझ लो उसे जीवन में सफलता मिल गयी | इसके हमे समय समय पर कुछ न कुछ चीजों से या फिर लोगों से हमेशा सीखते रहना चाहिए | इस पोस्ट में हमने 9 ऐसी प्रेरणा दायक कहानियों को शामिल किया है जिनसे आप अपने जिंदगी को जीने के लिए एक नया नजरिया दे सकते हैं |Motivational story in hindi

बलिदान [ Motivational Story in Hindi ]

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Motivational story in hindi एक खूखार लकड़बग्घे ने गाँव वालों को बहुत परेशान कर रखा था। रात में वह चुपके से गांव में घुस आता। कभी किसी पशु को मार कर उठा ले जाता, कभी किसी बच्चे को। लकड़बग्धे को मारने की गाँव वालों ने बहुत कोशिश की, पर वह हाथ नहीं लगा। बाहर से शिकारी भी बुलाये गये, लेकिन के भी उसे मारने में असफल रहे। चारों ओर से निराश गाँव वालों ने सोचा चल कर बुजुर्गों से सलाह लेनी चाहिए। अब तो वही कोई रास्ता सुझा सकते हैं।

वे सब मुखिया समेत बुजुर्गों के पास पहुंचे। उनके सामने अपनी समस्या रख कर उपाय पूछने लगे।

एक बुजुर्ग ने कहा,”जानवर आग से डरते हैं। रोज रात को गाँव के.चारों ओर आग जलाये रखो। लकड़बग्घा हरगिज नहीं आयेगा।”

‘लेकिन यह तो बहुत मुश्किल काम है।” एक युवक ने तर्क किया “भला, इतनी लकड़ी आयेगी कहाँ से? घरों में चूल्हा जलाने के लिए भी तो ठीक से लकड़ी नहीं मिलती।”

युवक की बात लोगों को उचित लगी। कुछ देर बाद एक दूसरे बुजुर्ग ने कहा, “चलो लकड़ी नहीं है तो न सही। फिर तो ऐसा करो भैया, गाँव के चारों ओर एक गहरी खाई खोद लो। उसमें लबालब पानी भर दो, हा लकड़बग्घा तैरना तो जानता नहीं, गाँव में घुस ही नहीं पायेगा।

“हाँ, यह तो हो सकता है।” कुछ लोगों ने दूसरे बुजुर्ग का समर्थन किया।

पर तुरंत उनकी बात काटते हुए वही युवक फिर बोला, “खाई खोदना मुश्किल नहीं है, लेकिन इतना ‘पानी आयेगा कहाँ से? गाँव के अधिकांश कुएँ तो सूख रहे हैं।”

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‘बात तो सही है” कुछ लोग युवक से सहमत हुए, लेकिन गाँव का मुखिया युवक को झिड़कते हुए बोला, “मैं देख रहा हूँ तुम हर बात में मेन-मीख निकाल रहे हो। अगर तुम इतने ही अक्लमन्द हो तो फिर स्वयं कोई रास्ता क्यों नहीं खोज निकालते हो क्यों अपना और बुजुर्गों का समय जाया कर रहे हो।”

युवक मुखिया की बात का बुरा न मानते हुए बोला, “बड़ों के सामने मुँह खोलते हुए मुझे संकोच हो रहा था दद्दा! वैसे एक तरकीब मेरे दिमाग में है।” उसकी बात सुन कर लोगों के चेहरे पर उत्सुकता दौड़ गई।

कुछ सोचते हुए वह बोला, “एक भारी-भरकम पिंजरा तैयार कराया, जो अपने आप बन्द हो जाता हो।”

मुखिया उसकी बात सुन कर व्यंग से हंस पड़ा और बोला, “खाली पिंजरे में लकड़बग्घा घुसेगा ही क्यों?”

आप ठीक कह रहे हैं। खाली पिंजरे में लकड़बग्घा क्यों घुसेगा। इसलिए पिंजरे के भीतर एक पशु बाँधना होगा। पशु के लालच में लकड़बग्घा पिंजरे के भीतर छलाँग लगायेगा। बस उसी झटके में पिंजरा बन्द हो जायेगा। सुबह आप लोग उसे खत्म कर दीजियेगा लेकिन इसके लिए हम में से किसी को अपना पशु बलिदान 11 करना होगा। बोलो, मंजूर है?”

“मंजूर है।”

युवक की बात लोगों को जंच गई। उन्होंने शाबाशी में उसकी पीठ ठोंकी। फिर गांव के लोहारों को आदेश दिया कि वे कल संध्या तक अपने आप बंद हो जाने वाला पिंजरा तैयार कर दें। पशु की कोई समस्या नहीं है। इतनी बड़ी विपत्ति से छुटकारा पाने के लिए कोई भी अपनी एक बकरी सहर्ष दे देगा।

सारी बात तय हो गई! लोग निश्चिंत होकर अपने- अपने घर चले गये।

दूसरे दिन संध्या से पहले ही पिंजरा बनकर तैयार हो गया और उसे गाँव की सीमा पर रख दिया गया। अब पिंजरे के अन्दर पशु भर बाँधना शेष था, इसी बात पर लोगों में विवाद छिड़ गया। कोई कहता, “तुम्हारे पास बहुत सी बकरियाँ हैं, एक दे क्यों नहीं देते ?'” कोई कहता, “तुम्हारे पास तो दर्जनों भेड़ें हैं। तुम ही एक दे दोगे तो कौन-सी कम हो जायेंगी?” कोई कहता, “मेरे पास तो दो ही बकरियाँ हैं। जरा सोचो, अगर मैं उनमें से एक लकड़बग्घे की भेंट चढ़ा दूं तो मेरे छोटे-छोटे बच्चे दूध के लिए नहीं तरस जायेंगे?”

इस ‘ तू-तू मैं-मैं’ में कोई फैसला न हो पाया। अँधेरा घिरने लगा। बात को कल पर टाल कर लोग अपने अपने घरों को चल दिये। लोगों की क्षुद्रता पर युवक का मन खिन्न हो उठा।

अपने झोंपड़े में लौट कर वह विचार करने लगा। लकड़बग्घा हर रात किसी न किसी की जान लेकर रहता है। आज भी वह किसी को अपना आहार बनायेगा हालांकि,कल अवश्य कोई न कोई अपने पशु की बलि देने के लिये राजी हो जायेगा, लेकिन अनिश्चय के कारण आज व्यर्थ ही एक निर्दोष को अपने प्राण गंवाने होंगे।

उसने सोचा अपने पशुओं के प्रति लोगों का मोह स्वाभाविक है। वे उन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार करते हैं। इसीलिए लकड़बग्घे को भेंट चढ़ाते हुए उन्हें कष्ट हो रहा है। तो क्यों न वह स्वयं पिंजरे में जाकर बैठ जाये? लकड़बग्घा उसे खा जायेगा, लेकिन गाँव वाले तो इस भयानक मुसीबत से छुटकारा पा जायेंगे। फिर वह अनाथ है, उसके मरने से किसी को कष्ट भी न होगा। उल्टे सब का भला ही होगा और उसका जीवन भी सार्थक हो जायेगा। Motivational story in hindi

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युवक तुरंत पिंजरे में जाकर बैठ गया और लकड़बग्घे के आने की प्रतीक्षा करने लगा ।

सुबह जब वह गाँव वाले शौचादि के लिए खेतों की ओर निकले तो अनायास उनकी दृष्टि पिंजरे की ओर गई। पिंजरे में बन्द लकड़बग्घे को देखकर वे हैरान रह गये। भागे-भागे पिंजरे के पास पहुँचे। भीतर का दृश्य देखते ही उनकी आँखें विस्मय से फट पड़ी। युवक की अधखायी लाश पिंजरे के भीतर पड़ी थी और लकड़बग्घा अपनी मौत की घड़ियाँ गिन रहा था।

सभी की गर्दने लज्जा से झुक गयीं। आँखें भीग गयीं। युवक ने अपने प्राणों की बलि देकर सारे गाँव को संकट से उबार लिया था और उनके सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया था, जो वास्तव में सब के लिए प्रेरणा बन गया।

 सुशांत सिंह राजपूत के जीवन से जुड़ी बातें हिंदी में |

परीक्षा [ Motivational Story in Hindi ]

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Motivational story in hindi  हरिचरण नाम का एक किसान था। उसके थोड़ी सी जमीन थी। दो बूढ़े बैल थे। उन्हीं के सहारे वह अपने खेत जोतता-बोता। जो भी उपज होती, उसी से अपने कुटुम्ब का पालन-पोषण करता।

दिन जैसे-तैसे कट रहे थे कि तभी दुर्भाग्य ने उस पर हमला बोल दिया। उसके बूढ़े बैल अचानक बीमार पड़ गये। किसान और उसकी बड़ी बेटी ने उनकी बड़ी सेवा की, मगर तीसरे दिन बैलों की मृत्यु हो गई। किसान की आँखों के सामने अँधेरा छा गया।

वह गाँव के कई संपन्न किसानों के पास सहायता माँगने गया। उनके पास तीन-तीन जोड़ी बैल थे, किन्तु किसी को उस पर दया न आई। उल्टा उन्होंने तिरस्कार कर उसे अपनी चौपाल से यह कह कर निकाल दिया, हम संपन्न। जाओ, अपनी बराबरी वालों से जाकर बैल मांगो।

बराबरी वालों की हालत उससे बेहतर न थी भला उनसे उसे क्या मदद मिलती!

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चिंता के मारे किसान ने भोजन आदि करना भी छोड़ दिया। उसकी बड़ी बेटी कमला से पिता की दयनीय हालत देखी न गई। एक संध्या वह पिता से बोली, “आप चाहें तो बड़ी आसानी से नये बैल खरीद सकते हैं।”

बेटी की बेसिरपैर की बातें सुन किसान खीझ उठा। उसे डपट कर बोला, “तेरा दिमाग तो नहीं चल गया है? दो जून खाने के लिए तो जुटता नहीं नये बैल कहां से खरीद लूंगा?”

पिता की खीझ स्वाभाविक-थी। बेटी ने डांट का बुरा न मानते हुए कहा, “एक तरकीब बता सकती हूँ। अगर आप उस पर अमल करें तो हमारी सब मुसीबत चुटकियों में हल हो जायेगी।’

किसान बेटी की बात सुनकर हैरान हो उठा। वह उसकी बड़ी बेटी थी। काम काज में पूरा हाथ बंटाती थी। अन्य बच्चों की अपेक्षा वह अधिक समझदार और बुद्धिमान थी। उसने सोचा बात सुनने में क्या हर्ज है? वह गुस्सा थूककर बोला, “चल सुना अपनी तरकीब ।”

बेटी समझ गई कि पिता उसे गंभीरता से नहीं ले रहे, मगर उसने परवाह किये बगैर कहा, “आप ने सुना होगा कि ललितपुर गाँव के जमींदार सेवक सिंह को शर्त लगाने का बहुत शौक है। जो भी व्यक्ति उनकी शर्त हल कर देता है वे उसे दस हजार अशर्फियाँ देते हैं । आजकल उन्होंने एक नई शर्त लगाई है। आप शर्त सुन आइये, हल मैं कर दूंगी। हमें पुरस्कार मिल जायेगा तो सारे कष्ट दूर हो जायेंगे।”

बेटी की शेखचिल्ली-सी बातें सुनकर किसान अपनी हँसी न रोक सका। हँसी किसी प्रकार रुकी तो वह बोला, “बेटी! तरकीब तो तूने बड़ी जोरदार सोची है, लेकिन क्या तुझे यह भी पता है कि आज तक इक्के दुक्के ही सेवक सिंह की शर्त हल कर पाये हैं। तू तो उन सब के सामने एक बच्ची है।”

कमला ने कहा, “इसका फैसला आप मुझ पर छोड़ दीजिये। बस, आप समय न गंवाइये। फौरन सेवक सिंह के पास जाकर शर्त पूछ आइये। कहीं ऐसा न हो कि शर्त कोई और हल कर दे और हम बैठे ताकते रह जायें “

किसान ने सोचा कि जब बेटी इतना जोर दे रही है तो सेवक सिंह से जाकर मिल ही आता हूँ। शर्त हल नहीं भी हुई तो क्या नुकसान है? Motivational story in hindi

अगले दिन ही वह सेवक सिंह के पास जाकर शर्त सुन आया और बेटी से आकर बोला, “किसी लड़की की तीन स्थानों से मंगनी आई। एक जगह की मंगनी लड़की की माता ने, दूसरी जगह की मंगनी उसके भाई ने, तीसरी जगह की मंगनी उस के पिता ने स्वीकार कर ली। विवाह की तिथि निश्चित हो गई। भाँवर वाली रात को तीनों स्थानों से बारातें आकर दरवाजे पर लग गया दुर्भाग्यवश उसी रात लड़की को साँप ने काट खाया और वह मर गई। लड़की के तीनों वरों में से एक वर तो लड़की की चिता के साथ ही जल मरा। दूसरे वर ने दुःखी होकर अन्न-जल त्याग दिया। तीसरे ने देवी की आराधना कर संजीवनी मन्त्र प्राप्त किया। उस मन्त्र से उसने लड़की और चिता में उस के साथ जल मरे वर को फिर से जिला दिया। बताओ, लड़की वास्तव में किसे मिलनी चाहिये?”

प्रश्न सुनकर कमला कुछ देर सोचती रही फिर बोली, “उत्तर बहुत आसान है जिस ने उस लड़की को जीवन दान दिया, वह तो उसका पिता हुआ। जो कन्या के साध जल मरा, वह उसका बावला भाई हुआ। जिस ने उसके दुःख में अन्न-जल का परित्याग किया। वह उसका पति हुआ। लड़की उसी को मिलनी चाहिये।”

किसान ने तत्काल सेवक सिंह को अपनी बेटी का उत्तर सुना दिया। सेवक सिंह उत्तर सुनकर अचंभित रह गया और खूब प्रसन्न हुआ। उसने तुरंत अपने खजांची को बुला कर किसान को दस हजार अशर्फियाँ प्रदान करने का आदेश दिया। अशफियाँ लेकर उल्लासित किसान जैसे ही घर की ओर लौटने लगा कुछ सोचते हुए सेवक सिंह ने उसे वापस बुलाकर कहा, “मैंने तुम्हारी बुद्धिमान और सुशील बेटी का बहुत नाम सुना है। आज उसका प्रमाण भी मिल गया। मैं उसे अपने घर की बहू बनाना चाहता हूँ। क्या तुम्हें यह संबंध स्वीकार है?” .

सेवक सिंह का प्रस्ताव सुनकर गरीब किसान हरिचरण को अपने कानों पर विश्वास न हुआ। अनायास उसकी आँखों में आँसू छल-छला आये। वह भाव विह्वल होकर बोला, “ठाकुर साहब! मेरे घर तो दो दो दिन चूल्हे में आग भी नहीं पड़ती। कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली! भला किस मुँह से मैं अपने दरवाजे पर आपका स्वागत करूंगा!”

सेवक सिंह ने स्नेह से किसान की पीठ थपथपाई और कहने लगे, “भाई, माना मैं पैसे वाला हूँ, तुम विपन्न। लेकिन संतान के मामले में तुम मेरी अपेक्षा अधिक संपन्न हो।”

सेवक सिंह की बात सुनकर किसान विस्मय से भर ,”यह आप क्या कह रहे हैं ठाकुर साहब?” उठा,

सेवक सिंह अपने मन की पीड़ा प्रकट करते हुए बोले, “ठीक ही तो कह रहा हूँ हरिचरण! तुम्हारे पास कमला जैसी बुद्धिमान और गुणी बेटी है। मेरे पास बिगड़ा हुआ बदचलन बेटा। किंतु मुझे विश्वास है कि तुम्हारी बेटी अवश्य मेरे घर को नष्ट होने से बचा लेगी।” Motivational story in hindi

“लेकिन…” किसान ने संकोचपूर्वक कुछ कहना चाहा, पर सेवक सिंह ने उसकी बात पूरी नहीं होने दी। उसे आश्वस्त करते हुए बोले, “तुम चिंता न करो घर जाकर बेटी के ब्याह की तैयारी करो। ब्याह का सारा खर्च मेरी ओर से तुम्हारे पास पहुंच जायेगा।”

किसान के तो जैसे भाग जाग उठे। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी बेटी बड़े घर की बहू बनेगी। वह खुशी-खुशी बेटी के ब्याह की तैयारी में लग गया।

सेवक सिंह के बेटे प्रभाकर ने जब यह खबर सुनी कि उसके पिता ने दरिद्र लड़की की बुद्धिमता गर मोहित होकर उसे अपनी बहू बनाने का निश्चय किया है तो वह कमला पर चिढ़ उठा। वास्तव में प्रभाकर एक अन्य लड़की से प्रेम करता था। उसी से ब्याह भी करना चाहता था, किन्तु घर वाले उस की इच्छा के विरुद्ध थे।

प्रभाकर ने मन ही मन कमला से बदला लेने की ठानी। उसने सोचा ब्याह किसी प्रकार टल नहीं सकता, किन्तु वह कमला की बुद्धिमता की ऐसी कठिन परीक्षा लेगा कि उसकी सारी चतुराई धरी रह जायेगी और एक दिन तंग आकर वह सदैव के लिए अपने मायके चली जायेगी। फिर चैन से दूसरी लड़की से विवाह कर लेगा।

इधर किसान को प्रभाकर के मंसूबों की भनक लग गई। उसने सोचा प्रभाकर मेरी बेटी से ब्याह के विरुद्ध है। अतएव मेरी बेटी उसके घर जाकर सुखी नहीं रहेगी। उसने कमला को एकांत में बुलाकर सारी बातें बता दी और उसे समझाना चाहा कि उसका सुख ही उसके लिए सब कुछ है। वह चाहे तो प्रभाकर से ब्याह के लिए मना कर दे। जो भी परिणाम होगा, वह भुगत लेगा। किन्तु कमला ने पिता से कहा, “पिताजी आप निश्चिंत रहिये। वे मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।”

कमला को यह भी खबर मिली कि प्रभाकर अपने घर में एक कुआँ खुदवा रहा है। उसने तुरंत अपने घर से लेकर कुएँ के तल तक एक सुरंग तैयार करवा दी। दोनों का विवाह हो गया। Motivational story in hindi

सेवक सिंह बहू के घर आते ही निश्चिंत होकर तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े। पिता के घर से जाते ही प्रभाकर ने तेवर बदले। उसने फौरन कमला को कुएं में डलवा दिया और उस पर कटाक्ष करता हुआ योला, “बड़ा = चतुर बनती हो ना! अब चखो मजा अपनी चतुराई का। मैं कमाने परदेस जा रहा हूँ। जब लौटूंगा तो मेरे द्वारा तुम्हारे तीन पुत्र हो जाने चाहिए। अगर नहीं हुए तो तुम्हें इसी कुएं में जीवन पर्यन्त सड़ना होगा।” फिर उसने अपने घर वालों से कहा, “इसके भोजन के लिए प्रतिदिन कोदों का भात कुएँ में भिजवा दिया करना।” 

प्रभाकर के परदेस रवाना होते ही कमला सुरंग के द्वारा अपने पिता के घर पहुंच गई।

उसने अपने पिता से कहा, “मेरे स्वामी के घर वाले रोज मेरे लिए कुएँ में भोजन लटकाएंगे। आप कुएँ के भीतर किसी को भेज दिया करिये। वह मेरे हिस्से का भोजन लेता रहेगा तो मेरे घर वालों को भ्रम बना रहेगा कि मैं कुएँ के भीतर ही हूँ।”

पिता को समझा-बुझाकर कमला अपने पति का पीछा करते हुए परदेस चल पड़ी। पति जिस नगर में ठहरा उसी के घर के सामने एक मकान किराये पर लेकर वह फूल बेचने वाली के भेष में रहने लगी । धोड़े ही दिनों में उसने अपने पति को आकर्षित कर लिया |

समय व्यतीत होता रहा इसी बीच उसे तीन पुत्र हुए।

कुछ दिनों बाद प्रभाकर ने फूल वाली से कहा, मुझे अपने कुटुम्ब की याद आ रही है। मैं कल ही अपने घर जा रहा हूँ। ये बीस हजार अशर्फियाँ रख लो, बच्चों की देखभाल के काम आयेंगी। यह कहकर प्रभाकर कमाया हुआ धन साथ लेकर अपने घर की ओर रवाना हो गया।

कमला भी अपने पुत्रों समेत गुपचुप एक बन्द रथ में सवार हो अपने पिता के घर की ओर चल पड़ी। पिता के घर पहुंचकर उसने तुरंत उन्हें बीती बातें बता दी और सुरंग के द्वारा अपने पुत्रों समेत कुएँ में जा बैठी।

प्रभाकर रास्ते में अपने मित्रों से मिलता मिलाता कुछ दिनों बाद घर पहुंचा। घर पहुंचते ही उसने पत्नी कमला की कुशलक्षेम जाननी चाही। घर वालों ने बताया कुएँ में उसकी पत्नी ठीक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह कुएँ से आवाज लगाकर ज्यादा भोजन माँगती है।

प्रभाकर ने हैरत में पड़ कर पूछा,”वह किस लिये?” 

‘वह कहती है कि इतने भोजन में तो एक आदमी का भी पेट नहीं भर सकता, हम चार-चार प्राणी कैसे जीवित रहेंगे?”

“चार-चार प्राणी?” घर वालों की बात सुनकर प्रभाकर चकरा उठा। उसने अविश्वास से भरकर पूछा, “कुएं में तो सिर्फ कमला को छोड़कर गया था। ये अन्य तीन प्राणी कहाँ से आ गये?” Motivational story in hindi

उसके मन में तुरंत कुविचार आया। कुएँ में पर पुरुष तो कमला के साथ नहीं रह रहा? फिर तो मैं इस कुलच्छनी को जीवित नहीं छोडूंगा। यह निश्चय कर उसने तुरंत कुछ लठैतों को बुलवाया और उन्हें कुएँ चारों ओर तैनात कर दिया उन्हें समझा दिया कि जैसे ही उसका संकेत हो लाठियाँ बरसाना शुरू कर दे।

इसके बाद उसने एक खटोला मंगवाया। उसे रस्सियों के सहारे कुएँ में उतार कर कमला को अन्य तीनों प्राणियों समेत ऊपर आने का हुक्म दिया। रस्सी ऊपर खींची गई तो सारे लोग यह देखकर अवाक रह गये कि खटोले पर कमला तीन बच्चों समेत बैठी हुई है। प्रभाकर को लगा कि बच्चों को उसने कहीं देखा है, किन्तु यह उसे अपनी दृष्टि का भ्रम प्रतीत हुआ। उसने कठोर स्वर में कमला से पूछा

“ये बच्चे किसके हैं?”

कमला ने निर्भीक स्वर में उत्तर दिया, “आपके

स्वामी।”

“मेरे हैं?”

“हाँ, हाँ आपके।”

यह कह कर कमला ने बीस हजार अशर्फियों से भरी थैली प्रभाकर के चरणों में रख दी। फिर उसे सारा किस्सा ज्यों का त्यों सुना दिया। उसने उसे घर की सारी चाबियाँ सौंप कर घर की मालकिन बना दिया और स्वयं भी मान-मर्यादा से रहने लगा। ठीक ही कहा गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी साहस से काम लेता है। और अपने उद्देश्य में सफल होता है।

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अवसर का लाभ [ Motivational Story in Hindi ]

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Motivational story in hindi एक गरीब युढ़िया थी। उसके तीन जवान बेटे थे । बुढ़िया के पास थोड़ी-सी खेती थी यह रात-दिन मेहनत करती। भूमि विशेष उपजाऊ न थी, इसलिये खेती में अनाज भी कम पैदा होता। परिवार की गुजर-बसर में बड़ी कठिनाई होती।

एक रात बुढ़िया अचानक बीमार पड़ गई। वह अपने बेटों के भविष्य को लेकर चिन्तित हो उठी । खेती तो पहले ही बहुत कम है। तीनों में कहीं बंटवारे की नौबत आ गई तो निश्चित ही वे भूखों मर जायेंगे अभी उनका शादी ब्याह होना भी बाकी है। कैसे उनका जीवन बीतेगा? यही चिन्ता करने हुए वह सारी रात जागती रही।

सुबह बुढ़िया ने तीनों बेटों को अपने पास बुलाया। उनकी बुद्धि और पौरूष की परीक्षा के लिये उन्हें एक एक हजार अशर्फियाँ देकर बोली

“बच्चों, मैं चाहती है कि मेरे मरने से पहले तुम लोग कमा-धमा कर अपना अपना घर बसा लो। इसलिये इन पैसों को लेकर तुम लोग नगर चले जाओ और व्यवसाय करके जल्दी घर लौट आओ।”

बड़े बेटे ने चिन्तित स्वर में कहा, “माँ, हम तुम्हें इस हालत में छोड़कर कैसे जायें?”

बुढ़िया ने कहा, “तुम लोग मेरी चिन्ता न करो। अड़ोस-पड़ोस के लोग बड़े भले हैं। मेरा खूब ध्यान रखते हैं। फिर वैद्य जी रोज आकर देख ही जाया करेंगे। ” Motivational story in hindi

रूपये लेकर तीनों पुत्र अलग-अलग नगरों के लिये चल पड़े।

बड़े बेटे ने रास्ते में सोचा-माँ ने पेट काट कर ये रूपये बचाये होंगे। इन रूपयों को किसी व्यापार में लगा का जी तोड़ परिश्रम करूँगा। खूब धन कमाऊँगा, ताकि इस उम्र में माँ को खेतों में खटने की जरूरत न रहे। जीवन-भर वह हमें पालने के लिये कष्ट झेलती रही है।

यह सोचकर उसने नमक का व्यापार करना शुरू कर दिया। वह रोज सुबह मंडी जाता, नमक के बोरे खरीदता, उन्हें अपनी छोटी-सी दुकान में लाकर बेच देता। नमक की जरूरत तो रोज हर घर की होती है। अतः उसकी बिक्री भी खूब होती। मुनाफा भी नकद हाथ लगता।

कुछ ही महीनों की लगातार मेहनत से बड़े बेटे की दुकान दुगनी-तिगुनी होती गई।

वह रहता भी बड़ी सादगी से था। काम में सहायता के लिये उसने नौकर-चाकर रख लिये। उसके मित्र उसे व्यसनों में घसीटने की कोशिश करते। वह उनके संग उठता-बैठता अवश्य, किन्तु न मद्यपान करता न हुक्का पीता न पान खाता न नर्तकियों की महफिलों में आता जाता। मित्र हमेशा उसकी सादगी का उपहास करते। उसे धिक्कारते। भला ऐसे धन से क्या लाभ जिस से जीवन के सुख न भोगे जा सकें।

लेकिन उसके ऊपर मित्रों के उकसाने का कोई असर न होता। उसकी आँखों के सामने बस बीमार बुढ़िया माँ का चेहरा घूमता रहता। वह हरदम यही सोचता कि जल्दी से जल्दी वह इतना धन कमा ले कि फौरन माँ के पास लौट सरके। वहाँ पहुँच कर एक अच्छा घर बना ले। कुछ बीघे खेत खरीद ले ताकि घर-गृहस्थी के लिये एक निश्चित आय माँ को मिलती रहे। वह बिस्तर पर बैठी बैठी सुख भोग सके। Motivational story in hindi

इधर किसी अन्य नगर में पहुँचे हुए बुढ़िया के दूसरे बेटे ने सोचा-माँ की मंशा है कि हम सब भाई अपने पैरों पर खड़े हो जायें। उसने न जाने कैसे पैसे बचाकर हमें दिये हैं। कोई ऐसा व्यापार करना चाहिये जिस से मूलधन सुरक्षित रहे ही बाकी खर्च भी चलता रहे ताकि जब मैं लौटूं, माँ को मूलधन लौटा सकूँ।

यह सोचकर उसने वस्त्रों का व्यापार शुरू कर दिया। वह जुलाहों के पास जाता। उनसे तरह-तरह के वस्त्र खरीदता, फिर अपनी दुकान पर लाकर बेच देता। धीरे धीरे उसका व्यापार फलने-फूलने लगा। वह खूब धनवान हो गया, उस ने माँ के लिये दस हजार अशर्फियाँ अलग निकाल कर रख दी और आराम से जीवन बिताने लगा।

उधर तीसरे बेटे ने एक नगर में पहुँच कर सोचा- माँ ने हमें दाने-दाने को तरसा कर पाला है। वह निर्धनता का ढोंग करती रही है। उसके पास खूब धन है।

जरूर उसने कहीं गाड़ रखा हुआ है। वरना भाइयों में बाँटने को यह तीन हजार अशर्फियाँ कहाँ से आतीं?

उसने तय किया व्यापार आदि के झंझट में कौन अपना खून जलाये। इन पैसों से तो खूब मौज-मस्ती करनी चाहिए। जब खत्म हो जायेंगे तो घर लौट जाऊँगा। माँ का क्या है, फिर से पैसे निकाल कर देगी।

यह सोच कर तीसरे बेटे ने अपना सारा धन मद्य मांस और ऐशो-आराम में लुटा दिया। यहाँ तक कि कुछ मित्रों से उधार लेकर भी खर्च कर डाला। Motivational story in hindi

कुछ समय बाद बुढ़िया के तीनों बेटे घर लौट आये। घर पर उन्होंने बीमार माँ को मृत पाया। पड़ोसियों ने बताया कि कुछ दिनों पहले ही बुढ़िया उनका नाम रटते- रटते स्वर्ग सिधार गई। उन लोगों का कोई अता-पता तो था ही नहीं। कोई खबर करता भी तो कैसे ? उन्ही लोगों ने मिलकर दाह-संस्कार कर दिया।

माँ की मृत्यु का समाचार सुन वे दुःख से कातर हो उठे।

जिसने अपना सारा धन गुलछरों में उड़ा दिया था, वह सब का दास बन कर घर में गुजर करने लगा। जिस ने मात्र मूलधन बचा कर रखा था, वह बड़े भाई के हिसाब-किताब में हाथ बंटाने लगा। बड़े भाई की समाज में खूब इज्जत हुई। एक धनी किसान की बेटी से उसका ध्याह हो गया। वह दान-पुण्य करता हुआ ठाठ से गाव में रहने लगा।

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आधी छोड़ सारी को धावै [ Motivational Story in Hindi ]

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एक शिकारी था। वह जंगल में शेर, चीते, भालू, हिरन, लकड़बग्घे आदि जानवरों का शिकार करता और उनकी खाल निकाल कर अपने परिवार का भरण पोषण करता। एक दिन व्यापारी ने शिकारी से कहा “भाई, हमें साबुत हाथी दाँत की जरूरत है। हाथी दाँत आसानी से नहीं मिलता, लेकिन तुम साहसी शिकारी हो। थोड़ा-सा श्रम और करो तो मुझे हाथी दाँत लाकर दे सकते हो। बदले में मैं तुम्हें बहुत-सा धन दूँगा।”

धन की बात सुन कर शिकारी के मुँह में पानी भर आया। उसने सोचा कि व्यापारी ठीक ही कह रहा है। जितनी मेहनत वह शिकार खोजने में करता है, अगर हाथी दाँत खोजने में लगाये तो रातों-रात उसके कष्ट दूर हो जायेंगे। वह मालामाल हो जायेगा, ‘कल ही मैं हाथी दाँत की खोज में निकल पड़ेंगा।’

उत्साहित शिकारी ने मन ही मन निश्चय किया। घर पहुँच कर उसने अपनी पत्नी से कहा “देखना-

दो-चार दिन में मैं खूब धनी हो जाऊँगा।’ शिकारी की पत्नी उसकी बात सुनकर हैरान हो उठी|

वह बोली “सो कैसे?”

शिकारी ने व्यापारी से हुई सारी बातचीत अपनी पत्नी से सुना दी। सुन कर उसकी पत्नी प्रसन्न हो उठी। लेकिन कुछ ही देर बाद मचल कर, बोली-“देखो जी, इतने साल हो गये तुम्हारे संग रहते, तुमने आज तक मुझे कोई गहना बनवा कर नहीं दिया। सो कान खोल कर सुन लो। उन पैसों से मैं सबसे पहले गहने बनवाऊँगी।”

शिकारी उत्तर दिया-” ठीक है भागवान, तेरे गहने भी बन जायेंगे। थोड़ा सब्र रख। पहले मुझे एक बड़ा सा घर बनवा लेने दे। इस कोठरी में रहते मेरा जी ऊब गया है। अच्छा घर बन जायेगा तो बिरादरी में हमारी मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।”

दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे। उसकी पत्नी कहती पहले गहने बनेंगे। शिकारी कहना कि पहले घर बनगा। इसी चख-चख में सारी रात बीत गई। दोनों में से कोई भी न सो सका।

सुबह थकान के मारे उठा नहीं जा रहा था, पर जंगल तो जाना ही था। रूखी सखी पेट में डाल कर वह कुल्हाड़ी और धनुष-बाण लेकर हाथियों की टोह में जंगल की ओर निकल पड़ा। दिन-भर जंगल में भटकता रहा। संध्या हो आई। सूज डूबने लगा। लेकिन हाथी उसे कहीं न दिखाई दिया। वह निराश हो उठा और घर लौटने की सोचने लगा। अभी वह जंगल के बीचोबीच बहती नदी को पार कर ही रहा था कि अचानक उसकी दृष्टि दूर पेड़ की पत्तियाँ चरते हुए एक हाथी पर पड़ी। शिकारी की बाँछें खिल गयीं। तेजी से नदी पार कर वह दबे पाँव आगे बढ़ा और हाथी के निकट ही एक घनी झाड़ी की ओट में खड़ा हो गया। निशाना साध कर शिकारी ने एक के बाद एक कई तीर छोड़े। उसका भाग्य अच्छा था। सारे तीर हाथी के मर्मस्थल पर लगे । हाथी चिंघाड़ता हुआ वहीं ढेर हो गया। Motivational story in hindi

शिकारी खुशी से झूम उठा। उसने धनुष बाण फेंक दिये और कुल्हाड़ी लेकर हाथी के दाँत निकालने चल पड़ा। दाँत निकालने में उसे काफी परिश्रम करना पड़ा, किन्तु धन की प्राप्ति की आशा में वह सारे कष्ट भूल गया।

जंगल से शिकारी सीधा व्यापारी की दुकान पर पहुँचा हाथी दाँत देख व्यापारी प्रसन्न हो उठा। उसे बदले में तुरन्त शिकारी को अशर्फियों से भरी थैली ही और उसकी पीठ ठोंकते हुए कहा-“जानवरों की खाल तो मामूली से मामूली शिकारी भी ला सकता है। मैं तुम पर बहुत खुश हूँ। अगली बार जब तुम हाथी दाँत लाओगे, मैं तुम्हें दुगुनी कीमती दूँगा।

घर पहुँच कर शिकारी ने पाया कि उसकी पत्नी चिन्तित-सी खड़ी उसकी बाट देख रही है। इतने विलम्ब से वह कभी घर नहीं आया था। पत्नी की घबराहट स्वाभाविक ही थी। जंगल का मामला था। रह-रह कर अनेक शंकाएं उसे विचलित कर रही थीं। पति को सामने देख उसने राहत की सांस ली। लेकिन जैसे ही उसकी दृष्टि उसके खाली हाथ पर पड़ी, तुनक कर बोली “इतनी देर कहाँ थे ?'”

“जंगल में।” शिकारी ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया। 

उत्तर सुन कर वह जल-भुन गई और बोली ” चलो आ रहे हो खाली हाथ?’ “

‘खाली हाथ कहाँ आया हूँ।”

‘तो क्या आज हाथी के बदले चींटी मार कर लाये हो?” उसकी पत्नी क्रोधित हो कर बोल पड़ी।

शिकारी ने पत्नी को अधिक खिझाना उचित नहीं समझा। फौरन टेंट से अशर्फियाँ भरी थैली निकाल कर उसकी ओर बढ़ा दी।

ढेर सारी अशर्फियाँ देख पत्नी की आँखें चौंधिया गयीं। उसने जीवन में पहली बार इतनी अशर्फियाँ देखी धीं। पैसे देखते ही उसका दिमाग घूम गया। वह फिर गहनों की जिद करने लगी, बोली-“पहले मेरे लिए गहने बनवाओ। घर का क्या है। गुजर तो आराम से हो ही रहा है। फिर बनवाना ही चाहते हो तो बाद में बनवा. लेना।” 

शिकारी ने उसे दोबारा समझाया” अगर तू इस धन को गहने बनवाने में खर्च करना चाहती है तो जरा सोच, गहने सँभाल कर रखेगी कहाँ? इस खस्ता हाल कोठरी में? चोर सेंध नहीं मार जायेंगे?” मजबूत घर बन जायेगा तो सभी वस्तुएं सुरक्षित रहेंगी। फिर क्या पता इतनी बड़ी रकम इकट्ठी हाथ लगे न लगे, इसलिये अच्छा यही होगा कि तू अपनी नादानी छोड़ दे।”

शिकारी ने पत्नी को ढाँढस बँधाने के लिये व्यापारी की बात भी कह सुनाई कि वह सब्र रखे। व्यापारी उसकी मेहनत से बहुत खुश है। उसने वादा किया है कि अगली बार जब वह हाथी दाँत लेकर आयेगा तो बदले में उसेदुगुनी अशर्फियाँ देगा। पर दुगुनी अशर्फियाँ तो तभी मिलेंगी जब वह व्यापारी को हाथी दाँत लाकर दे सकेगा। आज तो संयोग अच्छा था, किन्तु भविष्य में हाथी इतनी आसानी से हाथ नहीं लगने वाला। शिकारी ने पत्नी पर अपना संशय प्रकट किया।

दुगुनी अशर्फियों का प्रस्ताव सुनते ही पत्नी का उदास न मुख दमक उठा। वह पति का उपहास उड़ाते हुए बोली “तुम-सा मन्द बुद्धि मैंने दूसरा नहीं देखा। हाथी मिलने। में भला कौन सी कठिनाई है? तुम जंगल ही बहुत गलत . समय पर गये। हाथी का शिकार करना हो तो रात में जंगल जाना चाहिये। वह भी चाँदनी रात में। हाथी रात में नदी के किनारे पानी पीने आते हैं।” Motivational story in hindi

“वाह! तुमने तो बड़े पते की बात बतायी।” शिकारी पत्नी की बुद्धि का लोहा मानते हुए खुश होकर बोला, “चलो सारा टंटा ही खत्म हुआ। तुम पहले गहने ही बनवा लो। मैं कल रात ही जंगल जाकर हाथी का शिकार करूँगा। लगता है ईश्वर हम पर प्रसन्न है। शीघ्र ही हमारे संकट दूर हो जायेंगे।”

पत्नी ने कल की बात सुनी तो उसे चुनौती देते हुए बोली, “कल रात क्यों, आज की ही रात क्यों नहीं? आज तो शरद पूर्णिमा भी है। जंगल में खूब उजाला होगा। हाथियों का झुण्ड नदी में पानी पीने अवश्य आयेगा। अवसर मत चूको।”

शिकारी उलझन में पड़ गया। क्या करे? थकान से पूरी देह टूट रही थी। जंगल जायेगा तो सारी रात जागना पड़ेगा। पर पत्नी की सलाह भी उसे तर्कपूर्ण लगी। काफी सोच विचार के बाद उसने निर्णय किया कि वह पुनः जंगल जायेगा।

उसने पत्नी से कहा, “अशर्फियों की थैली सावधानीपूर्वक किसी सुरक्षित स्थान में छिपा दो और जल्दी से मुझे कुछ खाने के लिए भी दे दो……।”

त “तुम राई-रक्ती चिन्ता न करो।” पत्नी ने उसे आश्वस्त किया। खा-पीकर शिकारी जंगल के लिए निकल पड़ा।

एक तो घने जंगल का दुर्गम रास्ता। फिर खूखार जानवरों के आक्रमण का भय। पग-पग पर चौकन्ना शिकारी जब नदी के किनारे पहुँचा तो उसे दूर-दूर तक नदी का तट सूना दिखाई दिया। वह हताश हो उठा। कहीं ऐसा न हो कि उसकी जोखिम भरी मेहनत पर पानी फिर जाये। Motivational story in hindi

अचानक उसको ध्यान आया कि पत्नी ने कहा था आधी रात में ही हाथी नदी में पानी पीने आते हैं। आधी रात होने में अभी काफी समय है। चन्द्रमा भी अभी सिर पर नहीं आया है। उसे निराश होने की जरूरत नहीं है। लेकिन जंगल में हाथियों की टोह लेते हुए इधर-उधर भटकना खतरनाक है। अच्छा होगा कि कोई उपयुक्त स्थान खोज कर वह किसी ऊँचे पेड़ पर चढ़कर बैठ जाये जहाँ से हाथियों पर दृष्टि रखी जा सके और जानवरों के हमले से भी बचा जा सके। वह तुरन्त अपना धनुष बाण और कुल्हाड़ी लेकर एक ऊँचे पेड़ की मजबूत डाल पर चढ़ कर बैठ गया।

दिन भर के थके-माँदे शिकारी को बैठे-बैठे नींद आने लगी। हालत यह थी कि उससे ठीक से बैठा भी नहीं जा रहा था। उसने सोचा क्यों न डाल की टहनियों से टिक कर कुछ देर सुस्ता ले। जैसे ही हाथियों के आने की आहट होगी, यह सावधान होकर बैठ जाएगा।

टहनियों से टिकते ही शिकारी को गहरी नींद आ गई। सहसा कुछ तेज आवाजों से उसकी नींद उचटी। आवाजें उसे जानवरों की नहीं मनुष्यों की लगीं वह चौंक पड़ा। इतनी रात गए इस घनघोर जंगल में मनुष्य की आवाज। उसने इधर-उधर दृष्टि दौड़ाई, पाया कि बगल के पेड़ के नीचे तीन आदमी आग जलाये बैठे आपस में बतिया रहे थे उनकी बातें सुनकर शिकारी के कान खड़े हो गए। वे तीनों चोर थे और आपस में अपने चोरी के अनुभव सुना रहे थे ।

एक ने कहा, “आज तो धेलेभर की कमाई नहीं हुई। पता नहीं किस खराब घड़ी में सेंध मारी थी कि सिवा अनाज के कुछ हाथ नहीं लगा। भला अनाज ढोकर पा करता। Motivational story in hindi

उसकी बात पर चटखारे लेते हुए अन्य दोनों हो, हो, हो, हो, हँस पड़े। हँसी थमी तो दूसरा बोला, “आज अपनी भी हालत तुम-सी ही है। मित्र जहाँ मैंने चोरी की वह संयोग से एक बुढ़िया का घर था। बस, बक्से का ताला तोड़ने जा ही रहा था कि ऐन मौके पर बुढ़िया को खाँसी उठी और उसका बेटा उठकर बैठ गया। मैं सिर पर पैर रख कर भागा।”

‘इसका मतलब है आज मेरी ही ऐश रही।” तीसरा चोर चहक कर बाला, “मुझे तो अशर्फियों से भरी थैली हाथ लगी है।”

‘अच्छा! भई कहीं से ?” अन्य दोनों चोरों ने उत्सुकता दिखाई।

“एक शिकारी के घर से।”उसने बताया। फिर उन्हें सारा किस्सा थ्योरेवार सुनाने लगा, ” टिया बाती का समय था। मैं एक गाँव के गलियारे से गुजर रहा था। अचानक एक घर के सामने पति-पत्नी के झगड़े की आवाज सुन कर ठिठक गया। उनकी बातों से भनक लगी कि शिकारी अशर्फियों से भरी थैली लाया है। थैली शीघ्र पत्नी को सौंप कर वह शिकार के लिए वापस जंगल लौट जायेगा। मैं फौरन ताड़ गया रात में उसकी पत्नी घर पर अकेली होगी आराम से मैं अशर्फियों की थैली उड़ा सकता हूँ। यह देखो थैली!”

चोर की बातें सुनकर शिकारी का दिल ‘ धक्क’ रह गया। वह समझ गया कि चोर किसी और की नहीं, बल्कि उसी के घर के विषय में बातें कर रहा है। वह चोर पर आगबबूला हो उठा और मन ही मन बुदबुदाया, “ठहर, अभी मजा चखाता हूँ तुझको…. इतनी आसानी से तू मेरे खून पसीने की कमाई नहीं उड़ा सकता।”

शिकारी ने अपना धनुष-बाण उठाया और चोर का निशाना साधने लगा। निशाना साधते हुए अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। वह धनुष-बाण समेत धरती पर आ गिरा।

शिकारी के गिरने की आवाज सुनकर तीनों चोर चौंक पड़े और बिना पीछे मुड़े सिर पर पैर रखकर भागे। शिकारी काफी ऊंचाई से गिरा था। गिरते ही वह पीड़ा से कराह उठा। वाह चोरों का पीछा करना चाह रहा था। उसने अमहा पीड़ा के बावजूद उठने की कोशिश की लेकिन उसे लगा कि वह उठ नहीं सकता क्योंकि उसकी बांयी टाँग टूट कर बेकार हो चुकी थी।

विवशता और पछतावे से उसकी आँखों से आँसू उमड़ आये। वह स्वयं को धिक्कारने लगा वह क्यों नादान पत्नी की उतावली और बहकावे में आया ? क्यों लालच में पड़कर घर पर नहीं टिका ? अगर वह घर पर रहता तो चोर की क्या मजाल थी कि उसके घर में चोरी कर पाता ? और जितना धन कमाया उससे भी हाथ धोना पड़ा। अपंग हो जाने के कारण अब वह शिकार भी नहीं कर सकता था। Motivational story in hindi

डाह का फल [ Motivational Story in Hindi ]

Motivational story in hindi रामकली और फूलकली नाम की दो बहनें थीं। रामकली बहुत गरीब थी। वह गोबर के कण्डे पाथकर अपने कुटुम्ब का गुजारा करती। फूलकली सम्पन्न परिवार की बहू थी। उसके दिन सुख चैन से बीत रहे थे। दोनों बहनों में बहुत प्रेम था। आड़े समय पर फूलकली अपनी बहन की सहायता करने से न चूकती।

एक दिन की बात है। कन्डे पाथती हुई रामकली को एक साथु दिखा। रामकली ने गोबर सने हाथों से उसके चरण छूकर प्रणाम किया। साधु रामकली की श्रद्धा से बड़ा प्रसन्न हुआ। उसने रामकली को आशीर्वाद दिया तुम वैभव लक्ष्मी का व्रत करो । देवी की कृपा से तुम्हारे कष्ट दूर हो जायेंगे।

अब रामकली मुँह अँधेरे उठ जाती। स्नानादि करके देवी का ध्यान करने लगती। उसकी निष्ठा और भक्ति देख वैभव लक्ष्मी उस पर प्रसन्न हो उठी। एक सुबह वह पूजा से उठ ही रही थी कि अचानक आकाशवाणी हुई “रामकली जाओ, आज से तुम्हारे कष्ट दूर हुए। तुम जिस वस्तु की इच्छा करोगी। वह पूरी होगी।”

रामकली ने उमड़े हृदय से देवी को प्रणाम किया और उठकर रोज के कामधाम में लग गई। अचानक गोबर पाथते हुए उसे देवी के वरदान का ध्यान हो आया। उसने इच्छा की-ये कन्डे हीरे-मोती बन जायें। कन्डे तुरन्त हीरे-मोती बन गए। रामकली यह चमत्कार देख अचंभित हो उठी। उसका सोचना भर था कि झोंपड़ी एक सुन्दर कोठी में बदल गई। गरीब रामकली के दिन फिर गए। उसने हीरे-मोती अपने पुत्रों को देकर उन्हें व्यापार करने की आज्ञा दी। व्यापार खूब चल निकला। Motivational story in hindi

पूरा गांव रामकली का वैभव देख आश्चर्यचकित हो उठा। गांव में अफवाह फैल गई कि रामकली को सोने की अशर्फियों से भरे घड़े हाथ लगे हैं लेकिन फूलकली को इस अफवाह पर विश्वास नहीं हुआ। उसने अकेले में रामकली से पूछा-बहना पूरा गांव कह रहा है तुझे अशर्फियों से भरे घड़े हाथ लगे हैं। क्या यह बात सच है ?

बहन की बात सुन रामकली कुछ कहने से हिचकिचाई। फिर उसने सोचा-बहन से सच छिपाना ठीक नहीं। वह तो उसकी शुभचिन्तक है। यह सोचकर वह बोली, यह सारा धन वैभव लक्ष्मी की कृपा है। मैं प्रतिदिन मुँह अँधेरे उठ कर उनका ध्यान करती थी। देवी ने प्रसन्न होकर वरदान दिया। तुम जिस वस्तु की कामना करोगी तत्काल पूरी होगी।

फूलकली ने निश्चय किया, वह भी वैभव लक्ष्मी की आराधना करेगी। उसने दूसरे दिन से ही नियम पूर्वक देवी का ध्यान करना शुरू कर दिया। काफी समय बीत जाने के बाद अचानक एक दिन उसे आकाशवाणी सुनाई दी ” फूलकली मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हो तुम्हें कुछ देना चाहती हूँ। बोलो तुम्हें क्या चाहिए?”

फूलकली ने भाव-विह्वल होकर देवी को प्रणाम किया। फिर बोली, “माँ, आप बस मुझे यह वरदान दें कि जो वस्तु मेरी बहन माँगे, वह मुझे दुगुनी होकर मिले।”

“तुम्हारी इच्छा पूरी होगी।” देवी ने उसे आशीर्वाद दिया। Motivational story in hindi

वरदान पाकर फूलकली घमंड से भर उठी। एक दिन उसने रामकली से कहा, मुझसे आगे नहीं बढ़ पाओगी। देवी ने मुझे वरदान दिया है कि तुम जिस वस्तु की कामना करोगी, वह मुझे दुगुनी होकर मिलेगी।

फूलकली की बात पर रामकली को विश्वास न हुआ। उसने सत्य आजमाना चाहा। उसने इच्छा की-मेरे दरवाजे पर एक हाथी आ जाये। तुरन्त उसके दरवाजे पर एक हाथी आ गया। किन्तु यह देखकर वह दंग रह गई कि फूलकली के दरवाजे पर उसी समय हाथी की जोड़ी आकर खड़ी हो गई।

अब यही होता। रामकली जो कुछ अपने लिए माँगती, फूलवती के घर दुगुना हो जाता।

यह देख रामकली का मन प्रतिशोध से भर उठा। उसे बहन पर बड़ा क्रोध आया। बहन को उसकी सम्पन्नता हजम नहीं हुई। उसे अपने से नीचा देखना चाहती थी। इसलिए उसने देवी से विचित्र वरदान माँगा। लेकिन वह उससे मात खाने वाली नहीं है। उसे सबक सिखाकर ही रहेगी। यह निश्चय कर उसने एक दिन देवी से इच्छा प्रकट की, मेरी आलीशान कोठी कुटिया बन जाये ।

इधर फूलकली की दोनों भव्य कोठियाँ नष्ट हो गई। उसके स्थान पर खसफूस की दो कुटियाँ बन गई।

फूलकली समझ गई, रामकली दुष्टता पर उतर आई है। उसने उसे खूब कोसा और लताड़ा। उसे भिखारिन कह कर अपमानित किया। अपमान से तिलमिलाई हुई रामकली विवेक खो बैठी। उसने देवी से माँगा “मेरी एक आँख फूट जाये।” फूलकली की दोनों आँखें फूट गयीं। फिर उसने कहा, “मेरी एक टाँग टूट जाए और मैं एक हाथ से लूली हो जाऊँ।” तुरन्त फूलकली के दोनों हाथ, दोनों पाँव टूट गए। Motivational story in hindi

रामकली और फूलकली में इस तरह लड़ाई हो रही थी, अचानक आकाशवाणी हुई “तुम दोनों बहनों ने आपसी डाह के कारण मेरे वरदान का दुरूपयोग किया है। मैं तुम दोनों से वरदान की शक्ति वापस लेती हैं। अब तुम दोनों अपने किये का फल भोगो!”

दोनों बहनों को होश आया तो अपनी दुर्गति पर दोनों गले लगकर पश्चात्ताप के आँसू बहाने लगीं।

गरीब ब्राह्मण [ Motivational Story in Hindi ]

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Motivational story in hindi एक गाँव में द्रोण नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह बहुत दरिद्र था। रोज सबेरे उठकर वह भिक्षा माँगने निकल जाता। और जो कुछ भी मिलता उसी से पेट भर लेता। लोग उसकी फटेहाल अवस्था देखकर बहुत दुःखी होते। उसकी सहायता भी करना चाहते थे। मगर एक अड़चन थी। वह पढ़ा-लिखा नहीं था। पूजा-पाठ के विधि-विधान भी उसे नहीं आते थे। लोग चाहकर भी उसे अपने घर नहीं बुला पाते थे। यही वजह थी कि उसे दान-दक्षिणा का लाभ नहीं मिल पाता था। मात्र भिक्षा पर गुजर करनी पड़ती थी किन्तु वह उसी में प्रसन्न था।

एक बार यजमान को उस पर दया आ गई। यजमान ने सोचा कि मैं क्यों न इसे एक बैलों की जोड़ी दान कर दूँ। बैलों की देख-रेख में उसका अकेलापन भी दूर हो जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर वह उन्हें बेच भी सकता है। यही सोच कर यजमान ने बैलें की जोड़ी ब्राह्मण को दान कर दी।

बैलों की जोड़ी प्राप्त कर ब्रह्मण खुशी से फूला न समाया। उसकी दिनचर्या ही बदल गई। सुबह उठकर वह पहले बैलों के स्थान की सफाई करता। उन्हें तालाब में नहलाने धुलाने को ले जाता। फिर भिक्षा में प्राप्त अन्न में से काफी बड़ा हिस्सा बैलों को खिलाकर स्वयं भी भोजन करता। दिन चढ़ते ही वह भिक्षा माँगने के लिए निकल पड़ता। संध्या को जब वह घर लौटता तो खूब थका होता, फिर भी बैलों को घास चराने नदी के किनारे ले जाता। बैलों की जोड़ी उसके लाड़-प्यार और देखभाल के कारण कुछ ही दिनों में हष्ट-पुष्ट हो गई। जो भी बैलों की जोड़ी को देखता, देखता ही रह जाता।

एक दिन ब्राह्मण बैलों की जोड़ी को तालाब में नहला रहा था कि एक चोर की दृष्टि उन पर पड़ी। ऐसे हृष्ट-पुष्ट बैलों को देखकर चोर की लार टपकने लगी। उसने निश्चय किया कि वह बैलों को चुरा लेगा फिर उन्हें हाट में बेच देगा। इतने हृष्ट-पुष्ट बैलों को बेच कर उसे काफी धन प्राप्त होगा। कुछ दिन आराम से कटेंगे। Motivational story in hindi

अब समस्या सामने थी कि बैलों को चुराए कब ? दिन का समय उसे ठीक नहीं लगा। दिन में ब्राह्मण भिक्षा माँगने के लिए निकल जाता था। बैलों की देख रेख के लिए वहाँ कोई नहीं होता था । किन्तु दिन में पकड़े जाने का भय था क्योंकि सारे गाँव वाले ब्राह्मण के बैलों को अच्छी तरह पहचानते थे। उसने तय किया कि वह रात में बैलों को चुराएगा।

रात को जब वह अपने गाँव से चुराने के लिए निकला तो रास्ते में उसकी भेंट एक भयंकर आदमी से हुई जिसके लम्बे-लम्बे दाँत थे, लाल आँखें थीं, देह पर काँटो-से बाल उगे हुए थे।

“तुम कौन हो ?” चोर ने डरते-डरते पूछा ।’

“मैं ब्रह्मराक्षस हूँ।” भयंकर आकृति वाले ने उत्तर दिया। उसने चोर से पूछा, “तुम कौन हो?”

“मैं चोर हूँ।” चोर ने उत्तर दिया।

“इतनी रात को कहाँ जा रहे हो ?” ब्रह्मराक्षस ने अगला प्रश्न किया।

“बगल के गाँव में एक दरिद्र ब्राह्मण रहता है। उसके पास एक सुन्दर बैलों की जोड़ी है। मैं उन्हीं को चुराने जा रहा हूँ, मगर तुम कहाँ जा रहे हो ?”

ब्रह्मराक्षस बोला, “मैं तीन दिन में एक बार भोजन करता हूँ। आज मेरा भोजन वही ब्राह्मण है जिसके घर तुम बैल चुराने जा रहे हो।’ चोर ने प्रसन्न होकर कहा, वाह! तब तो अच्छा साथ रहेगा। हम एक ही नाव के यात्री हैं।

वे दोनों ब्राह्मण के घर पहुंचे और छुपकर बैठ गये। फिर बाट जोहने लगे कि कब ब्राह्मण सोए और वे अपना काम करें। जब ब्राह्मण गहरी नींद में सो गया तब ब्रह्मराक्षस उसे खाने के लिए आगे बढ़ा। चोर ने उसे टोका, “मित्र यह न्यायसंगत नहीं है। पहले मैं बैल चुरा लूं। फिर तुम ब्राह्मण को खाना।” Motivational story in hindi

ब्रह्मराक्षस ने कहा, “बैलों को चुराते हुए खटका होगा। ब्राह्मण जग जाएगा फिर मैं भूखा रह जाऊंगा। तुम मुझे पहले ब्राह्मण को खा लेने दो।”

चोर बोला,”जब तुम ब्राह्मण को खाओ, तो हो सकता है उसे पीड़ा हो। वह कराहे। उसकी कराह सुनकर आस-पास के लोग एकत्र हो जाएंगे। फिर मैं बैलों को नहीं चुरा पाऊँगा। इसलिए पहले मुझे बैलों को चुराने दो।”

दोनों में जमकर तू-तू मैं-मैं होने लगी। न ब्रह्मराक्षस चोर की बात मानने को तैयार हुआ न चोर ब्रह्मराक्षस की। थोड़ी देर बाद दोनों झगड़ पड़े। शोर सुनकर ब्रह्मण जग गया.। उसे जगा देखकर चोर ने बात बनाई, “ब्राह्मण यह राक्षस तुझे खाना चाहता है। पर शोर मचाकर मैंने तुझे बचा लिया।”

ब्रह्मराक्षस ने चोर की बात काटी, “यह चोर झूठा है। यह बैलों को चुराने आया था। मैंने शोर मचाकर तुझे लूटने से बचा लिया।”

ब्राह्मण तुरन्त उनके नीच इरादे भाँप गया। वह मन 42 ही मन अपने इष्टदेव को याद करने लगा। इष्टदेव को याद करते ही ब्रह्मराक्षस के भागते ही ब्राह्मण ने लपककर लाठी उठा ली और लगा चोर की पिटाई करने। चोर किसी प्रकार अपने प्राण बचाकर भागा।

तब से किसी को ब्राह्मण को तंग करने का साहस नहीं हुआ।

कुसंगति का फल [ Motivational Story in Hindi ]

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Motivational story in hindi राजा चंद्रधर के भव्य शयनकक्ष में शीलवती नाम की एकं जूँ रहती थी। उसके दिन बड़े सुख से कट रहे थे। राजा के पलंग पर उसका एकछत्र राज्य था। उसके अलावा उस पलंग पर अन्य कोई जन्तु न था।

शीलवती राजा के तकिये में रहती थी। तकिये से सदैव मंद-मंद सुगंध आती रहती क्योंकि दासियाँ पलंग पर तरह-तरह के इत्र छिड़का करती थीं। शीलवती पूरे दिन सुगंधित तकिये में दुबकी चैन से सोती रहती । संध्या को जब उसकी नींद टूटती, वह तकिये के भीतर से जगमग शयनकक्ष को देखती रहती। कभी वहां किसी नर्तकी का सुन्दर नृत्य होता, कभी किसी गायिका का सुरीला गायन कभी किसी कलाकार का सितार वादन। Motivational story in hindi

धीरे-धीरे राजा को नींद आ जाती। शीलवती धैर्य से उसके खर्राटों की प्रतीक्षा करती। जैसे ही राजा खरटि भरने लगता वह समझ जाती कि अब वह भूख मिटा सकती है। शीलवती नि:संकोच तकिये से बाहर निकल आती। पेट भर राजा का खून चूसती, फिर वापस तकिये में जाकर छिप जाती। यह क्रम महीनों से चला आ रहा था। पर न कभी राजा को किसी प्रकार का कष्ट हुआ न किसी की दृष्टि शीलवती पर पड़ी।

एक दिन की बात है। दिन का समय था। शीलवती चैन से तकिये में सो रही थी कि अचानक किसी जंतु की आहट से उसकी नींद उचट गई। उसने आँखें खोलकर आस-पास देखा। मगर तकिये में कोई न दिखाई दिया। शीलवती को लगा कि उसे भ्रम हुआ है। कोई जंतु भला राजा के पलंग पर आ सकता है। अनेक दासियाँ शयनकक्ष की सफाई में लगी रहती हैं। प्रतिदिन पलंग की झाड़पोंछ होती रहती है। द्वार पर सैकड़ों पहरेदार चौकने होकर पहरा देते हैं। फिर कैसे कोई जंतु पलंग पर आ सकता है ? लेकिन किसी के रेंगने की आहट बराबर आ रही थी। शीलवती ने सोचा कि तकिये से बाहर निकल कर पता लगाना चाहिए। 

शीलवती अभी तकिये से बाहर निकल ही रही थी कि अचानक उसकी दृष्टि एक गोल-मटोल जंतु पर पड़ी। वह ठिठक गई। जंतु उसके सामने आकर खड़ा हो गया और शीलवती के कुछ कहने से पहले ही हाथ जोड़कर बोला, “मुझ पर नाराज न हो बहन । मैं मुसीबत का मारा हूँ, तुम्हारी शरण में आया हूँ। अपने घर थोड़ी सी जगह दे दोगी तो जीवन-भर तुम्हारा उपकार नहीं भूलूँगा।”

उसकी गिड़गिड़ाहट का शीलवती पर कोई असर न हुआ। वह गुस्से से भरकर बोली, ” आखिर तुम हो कौन ? यहाँ आने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ?” Motivational story in hindi

“मैं खटमल हूँ बहन! तुम भले ही मुझे न जानती हो मगर हम एक ही बिरादरी के हैं।” खटमल ने काँपते हुए स्वर में कहा। फिर अपने ऊपर पड़ी विपत्ति बयान करने लगा कि वह बड़े आराम से एक सराय में रहता था। सराय में ठहरने के लिए तरह-तरह के लोग आते थे। उनके खून का स्वाद भी अलग-अलग होता था। मजे से लोगों का खून पीता और ठाठ से रहता था। एक रात राजा का एक सैनिक सराय में ठहरा। वह सैनिक का खून पीने उसकी गर्दन पर चढ़ गया। सैनिक का खून इतना मीठा था कि उसके पीते ही नशा आ गया।

वह सैनिक के कपड़ों में चिपक कर सो गया। कब सुबह हुई, कब सैनिक सराय छोड़कर राजमहल में आया उसे पता ही नहीं चला।

अभी कुछ क्षण पहले ही उसकी नींद टूटी तो उसने अपने को राजा के शयनकक्ष में पाया। सैनिक किसी काम से राजा के शयनकक्ष में आया था। शयनकक्ष देखकर वह भाँप गया कि इसी जगह वह अपना जाने बचाकर छिप सकता है। वह फुर्ती से सैनिक के कपड़ों में से सरककर फर्श पर गिर पड़ा और रेंग कर पलंग पर चढ़ गया। खटमल की करूण कथा सुनकर भी शीलवती का मन न पसीजा। उसने कहा, “यह सराय नहीं, राजमहल है। यहाँ चारों तरफ सैनिकों के पहरे लगे हुए हैं। किसी ने तुम्हें देख लिया तो मेरी भी शामत आ जाएगी। गनीमत इसी में हैं कि तुम फौरन यहाँ से चलते बनो।”

दाल न गलती देख चालाक खटमल ने पैंतरा बदला, “तुम जितनी सुन्दर हो बहन उतनी ही दयालु भी। मैंने 44 आज तक तुम जैसी समझदार जूं नहीं देखी। अगर तुम मुझे अपने घर में शरण नहीं दोगी तो मैं इसी क्षण सिर पटककर अपने प्राण त्याग दूँगा।”

अपनी प्रशंसा सुन शीलवती का मन एकाएक पिघल उठा। आज तक कभी किसी ने उसकी इतनी प्रशंसा न की थी। वह नम्र होकर बोली, “ठीफ है। तुम यहाँ रह 14 सकते हो। मगर एक शर्त है। सदैव मेरा कहना मानोगे।”

“मानूँगा।” खटमल ने कहा।

अब दोनों मजे से साथ रहने लगे। शीलवती ने पाया कि खटमल स्वभाव से बड़ा नेक और आज्ञाकारी है। उसके आ जाने से घर में रौनक आ गई है।

दिन बीतने लगे। मरियल-सा खटमल राजा का पौष्टिक खून पी कर काफी तगड़ा हो गया। पर धीरे धीरे वह रंग बदलने लगा। एक दिन की बात है। दोपहर का समय था। शीलवती गहरी नींद में सो रही थी कि आहट से उसकी नींद उचट गई। उसने खटमल को तकिये में रेंगते पाया। Motivational story in hindi

“क्यों, तुम सोए नहीं ?” शीलवती ने पूछा।

“नींद नहीं आ रही। खटमल ने उत्तर दिया।”

“मुझे बड़ी जोर की भूख लगी है। राजा पलंग पर लेटा आराम कर रहा है। मैं उसका खून चूस कर पेट भरने जा रहा हूँ।”

खटमल की बात सुनकर शीलवती डर गई। उसे समझाने लगी कि दोपहर का समय है। भोजन करके सुस्ता रहा है। वह ऐसे में खून चूसने जायेगा तो राजा को फौरन पता चल जाएगा फिर हमारी खैर नहीं। वह अपना गलत इरादा छोड़ दे।

मगर खटमल ने उसकी एक न सुनी। वह राजा की गर्दन से जाकर चिपक गया और दाँत गड़ा खून पीने लगा।

राजा को अचानक सूई की नोक-सी तीखी चुभन महसूस हुई। वह पीड़ा से तिलमिलाकर उठ बैठा और अपने सेवकों को पुकारने लगा। सेवकों को पहले तो उसने बुरी तरह फटकार लगाई कि वे उसके बिस्तर की सफाई ठीक से नहीं करते। जरूर बिस्तर पर कोई सूक्ष्म जंतु छिपा है जिसने उसे काट, खाया है। फिर आदेश दिया कि वे बिस्तर का कोना-कोना छान मारें और तुरंत जंतु को खोज निकालें।

राजा का क्रोध देख सेवक भय से काँपने लगे। उन्होंने बिस्तर उलट दिया और ध्यान से देखने लगे । परन्तु पूरा पलंग छान मारने के बाद भी गद्दों पर कुछ न मिला। अब तकिये की बारी आई। सेवकों ने तकिये को उलटा पलटा। फिर उसका गिलाफ उतार कर देखना शुरू किया। अचानक उनकी दृष्टि तकिए के एक कोने से चिपकी शीलवती पर पड़ी। सेवक खुशी से उछल पड़े।

एक सेवक ने तुरन्त शीलवती को उँगलियों से मसल कर मार डाला और राजा का पलंग फिर से उसी तरह बिछा दिया।

हुआ यों कि जैसे ही राजा के सेवकों ने गद्दों को उलटना-पलटना शुरू किया धूर्त खटमल सर्र से दौड़ कर पलंग की दरार में जा छिपा। वहाँ न सेवकों की दृष्टि जा सकती थी न किसी जंतु के छिपे होने का अनुमान ही हो सकता था। दुष्ट खटमल इसी कारण बच गया और बेचारी शीलवती को अपने प्राण गंवाने पड़े।

न्याय [ Motivational Story in Hindi ]

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Motivational story in hindi एक बार गाँव में बाढ़ आई। बाढ़ में निर्धन किसान रामदीन का सब कुछ नष्ट हो गया। घर ढह गया, फसल उजड़ गई। गाय, बैल बह गए। बेघर-बार रामदीन के सामने परिवार को पालने की समस्या आ खड़ी हुई। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस प्रकार अपने परिवार का पालन-पोषण करे। कई-कई दिन बिना खाये-पीये गुजर जाते। हार कर रामदीन ने निश्चय किया कि वह पड़ोस के गाँव में मजदूरी खोजेगा।

मजदूरी मिलने में उसे दिक्कत नहीं हुई। एक दयालु किसान ने उसे खेत के काम के लिए रख लिया। रामदीन मेहनती तो था ही। वह जी-तोड़ मेहनत करने लगा। फलस्वरूप किसान की फसल बहुत अच्छी हुई। एसा फसल पहले कभी नहीं हुई थी। किसान ने सोचा रामदीन की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि इस वर्ष उसे खेती में तिगुना लाभ हुआ है। बदले में रामदीन को भी लाभ का कुछ भाग मिलना चाहिए। उसने रामदीन को अपने पास बुलाया और कहा, “रामदीन तुम्हारी मेहनत से फसल में तिगुना लाभ हुआ है। मैं बहुत प्रसन्न हूं। तुम उसे अनाज के रूप में चाहते हो या किसी अन्य रूप में?”

रामदीन सोच में पड़ गया कि क्या माँगे। अनाज ले या कुछ और ? उसे ध्यान आया मजदूरी से उसने कुछ रूपये बचा कर रखें हैं जिनसे कुछ महीनों तक परिवार का पेट भर सकता है। उसने किसान से कहा, “आपकी 44 मुझ पर बड़ी कृपा रही है। लाभ के रूप में आप कुछ देना ही चाह रहे हैं तो खेती के लायक थोड़ी-सी भूमि दे दीजिए। मैं उस पर खेती करूँगा।” Motivational story in hindi

किसान को रामदीन की बात बुद्धिमतापूर्ण लगी । अनाज तो कुछ दिनों तक ही काम आएगा। किन्तु खेती से उसके कष्ट सदैव के लिए दूर हो जाएंगे। उसने तुरन्त दो खेत रामदीन के नाम लिख दिए।

प्रसन्न रामदीन अपने गाँव के एक धनी किसान के पास पहुँचा और उससे मदद मांगी कि अगर वह हफ्ते भर के लिए बैलों की एक जोड़ी उसे खेत जोतने के लिए दे दे तो उसका बड़ा उपकार होगा। काम खत्म होते ही वह बैलों को लौटा देगा। धनी किसान बड़ा काइयाँ व्यक्ति था, किन्तु रामदीन पर टूटी विपत्ति जानता था। उसका मन पसीज उठा। उसने तुरन्त बैलों की जोड़ी रामदीन के हवाले कर दी।

रामदीन ने खेतों की जुताई-बुआई कर ली तो एक दोपहर वह बैलों को लौटाने आया। धनी किसान उस समय भोजन कर रहा था। उसने रामदीन से कहा, “बैलों को उस बाड़े में बाँध दो।” रामदीन वैसा किया और अपने घर चला गया।

अभी वह अपने घर पहुँचकर सुस्ता ही रहा था कि धनी किसान ने दरवाजा खटखटाया और कहा, “बैलों की जोड़ी कहाँ है?”

“वह तो आपके बाड़े में बाँध आया हूँ।”

रामदीन ने उत्तर दिया।

“मगर बाड़े में तो बैल नहीं हैं ?” 

“मैंने तो बैल आपके सामने ही बांधे थे ” रामदीन घबराकर कहा।

धनी किसान क्रोधित हो उठा और बोला, “तुमने बैल बाड़े में बांधे तो क्या उन्हें बाड़ा लील गया ? तुम्हारी नियत खराब हो गई है रामदीन! तुम इसी समय राजा के पास चलो। मैं उनसे तुम्हारी बेईमानी की शिकायत करूंगा। तुम्हें सजा दिलवाऊँगा।” Motivational story in hindi

रामदीन ने उसे विश्वास दिलाने की बहुत कोशिश की। किन्तु उसने एक न सुनी। रामदीन समझ गया कि भाग्य उसके साथ खेल खेल रहा है। एक विपत्ति से छुटकारा नहीं मिलता कि दूसरी टूट पड़ती है। वह दुःखी मन से धनी किसान के साथ महल की ओर चल पड़ा।

अभी वह कुछ ही दूर गया था कि रास्ते पर तेजी से आते हुए घुड़सवार ने उसे अचानक धक्का देकर गिरा दिया। पत्थर से छिलकर रामदीन का दाहिना कान कट गया। जैसे ही वह सीधा हुआ वैसे ही उसने घुड़सवार को लक्ष्य बनाकर लाठी फेंकी। संयोग से लाठी घोड़े के, मर्मस्थल पर लगी। घोड़ा छटपटा कर ढेर हो गया और कुछ ही पलों में मर गया। आग बबूला घुड़सवार ने रामदीन को पकड़ लिया और कहने लगा, “नुमने मेरे प्यारे घोड़े को मार डाला। मैं तुम्हें राजा से मृत्यु दंड दिलवाऊँगा।”

यह कह कर घुड़सवार भी उनके साथ महल की ओर चल पड़ा।

चलते-चलते रात हो गई। उन्होंने नगर के बाहर डेरा डाल दिया वहाँ कुछ नट भी ठहरे हुए थे। रात में रामदीन सोने के लिए लेटा तो मन भारी हो उठा। उसने सोचा कि दुर्भाग्यवश जो कुछ भी मेरे साथ घटता जा रहा है, चाहे उसमें मेरा कोई दोष हो न हो, पर राजा आजन्म कारावास की सजा दिए बिना नहीं मानेगा। और जब मैं किसी प्रकार भी अपने परिवार की देख-भाल नहीं कर पाऊँगा और जब मैं परिवार का उत्तरदायित्व नहीं निभा पाऊँगा तो भला ऐसा जीवन जीने से क्या फायदा! इससे तो अच्छा है कि मैं स्वयं फाँसी लगाकर मर जाऊँ और जीवन का अंत कर लूँ। यह निश्चय करते ही वह आहिस्ता से उठा, नटों के सामान में से एक रस्सी निकाली। रस्सी को बरगद की डाल पर फँसा कर फंदा बनाया, फिर फंदा गले में पहन कर लटक गया। भाग्य ने यहाँ भी उसका साथ नहीं दिया। रस्सी कमजोर थी, टूट गई। वह नीचे सोये नटों के नेता पर धड़ाम से जा गिरा। नटों का नेता मर गया। Motivational story in hindi

नट जाग गए। उन्होंने रामदीन को पकड़ लिया और निश्चय किया कि वे भी उसे राजा के पास ले जाएँगे और न्याय माँगेंगे।

दूसरे दिन तीनों अभियोगी रामदीन को रस्सी से जकड़े हुए दरबार पहुंचे। उन्होंने राजा को अपनी-अपनी शिकायतें सुनाई फिर उनसे प्रार्थना की कि वे दुष्ट रामदीन को उसकी करनी का उचित दंड दें।

राजा बहुत बुद्धिमान था, सारा मामला फौरन ताड़ गया। उसने सबसे पहले धनी किसान से पूछा,

रामदीन बैल लेकर आया था तब तुम क्या कर रहे थे?” “हुजूर, उत्तर दिया। मैं भोजन कर रहा था।” धनी किसान ने

“बैल तुमने देखे थे?” राजा ने फिर पूछा।

‘देखे तो थे, हुजूर।”

“बैल तुम्हें वापस मिल सकते हैं।”

“वह कैसे हुजूर ?”

“पहले तुम उसे अपनी आँखें निकाल कर दो क्योंकि जिन आँखों से तुमने बैलों को देखा था उनकी बात पर विश्वास करने को तुम तैयार हो।”

राजा के निर्णय से धनी किसान खिसिया गया। इसके बाद राजा ने धुड़सवार से पूछा “रामदीन का कान कैसे कट गया ? “

” उसे रास्ते का पत्थर लग गया हुजूर।”

“रास्ते का पत्थर कैसे लग गया ?”

“घोड़े का धक्का खाकर वह रास्ते पर गिर पड़ा।”

“घोड़ा किसका था ?”

“मेरा था, हुजूर।”

“तुम्हें तुम्हारा घोड़ा मिल सकता है।”

घुड़सवार के चेहरे पर चमक दौड़ गई, “सो कैसे,

हुजूर ?”

“ऐसे कि तुम इसे इसका कान वापस कर दो। यह तुम्हारे घोड़े के प्राण लौटा देगा।” राजा के निर्णय से काँइयाँ घुड़सवार संकोच से गड़ गया। अब बारी आई नटों की। राजा ने उनसे प्रश्न किया,

“रस्सी किसकी थी ?”

“हमारी थी, हुजूर।”

“इतनी कमजोर क्यों थी ?”

“उस पर चढ़कर हम रोज खेल दिखाते थे, हुजूर! इसलिए घिस गई थी।

“तो ऐसा करते हैं कि तुममें से कोई नट इसी रस्सी का फंदा बनाकर डाल से लटक जाए। मैं रामदीन को ठीक फंदे के नीचे लिटाए दे रहा हूँ। रस्सी टूटेगी तो वह नट इसके ऊपर गिर जायेगा और वह स्वयं अपनी मौत मर जायेगा। इस तरह इसे अपने किये की सजा मिल जाएगी। तो कोई नट तैयार है बरगद के पेड़ पर लटकने को ?” Motivational story in hindi

राजा का निर्णय सुनकर सारे नट लज्जा से गड़ गए। राजा ने रामदीन को फौरन छोड़ दिया।

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श्वेत हाथी का दान [ Motivational Story in Hindi ]

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Motivational story in hindi बहुत पहले की बात है। शिवि राज्य में संजय नाम के एक राजा का शासन था। वह बहुत दयालु और धर्मात्मा था। अपनी प्रजा से वह बहुत प्यार करता था। प्रजा भी राजा को पिता की तरह सम्मान देती थी।

काफी समय के बाद राजा के यहाँ एक पुत्र का जन्म हुआ। रानी की गोद भरने से सारे राज्य में खुशी छा गई। राजा-रानी भी पुत्र पाकर निहाल हो गए। उन्होंने प्यार से अपने बेटे का नामरखा बेस्संतर।

बेस्संतर बहुत बुद्धिमान था। जल्दी ही वह सभी विद्याओं में निपुण हो गया। उसका साहस और लगन देखकर उसके गुरू चकित रह गए। धीरे-धीरे उसने अपने सद्व्यवहार और चतुराई से प्रजा का ही नहीं, ं मंत्रिमंडल का मन जीत लिया। वह हर हालत में अपनी प्रजा को प्रसन्न देखना चाहता था। धीरे-धीरे उसकी दानशीलनता की कहानियाँ दूर-दूर तक कही-सुनी जाने लगीं। 

उसी समय की बात है। पड़ोसी राज्य कलिंग में अकाल पड़ा। वहाँ के लोग अन्न-जल के लिए तरसने लगे। हर तरफ भुखमरी, गरीबी और लूट-खसोट होने लगी। वहाँ के राजा ने राज्य के पंडितों और विद्वानों की एक सभा बुलाई

इस समस्या से सभी परेशान थे। लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। उसी समय राजज्योतिषी ने कहा. “एक उपाय है महाराज, मगर है बड़ा कठिन ।”

यह सुनकर वहाँ बैठे सभी विद्वानों ने एक स्वर से कहा, “आप उपाय तो बताइए। इस संकट की घड़ी में हम कुछ भी करने के लिए तैयार हैं।” Motivational story in hindi

राजज्योतिषी बोले, “शिवि राज्य में एक श्वेत हाथी है। उसे अगर हमारे देश में ले आया जाए तो हमें इस संकट से छुटकारा मिल सकता है। श्वेत हाथी के हमारे देश की सीमा में आते ही वर्षा शुरू हो जाएगी। वर्षा होते ही हमारे सारे कष्ट दूर हो जाएँगे।”

श्वेत हाथी का नाम सुनते ही सभी निराश हो गये। क्योंकि सभी जानते थे कि श्वेत हाथी शिवि राज्य का शुभ चिह्न है और राज्य के शुभ चिह्न का अपना एक गौरव होता है…..उस हाथी के लिए एक महल बनाया गया है, महल के चारों तरफ कड़ा पहरा रहता है। यही नहीं, युवराज बेस्संतर के अलावा उस हाथी पर कोई दूसरा नहीं बैठ सकता। उसे लाने की बात तो दूर, उस तक पहुँचना ही असंभव था।

तभी मुख्य द्वार पर हो रही हलचल से दरबारियों का ध्यान उधर गया। राजा ने सैनिकों से पूछा कि क्या बात है ?

एक सैनिक ने बताया कि एक गरीब ब्राह्मण आपसे मिलना चाहता है। हमने उसे बहुत समझाया, मगर वह सुनता ही नहीं।

यह सुनकर महाराज ने उसे दरबार में पेश करने का हुक्म दिया। Motivational story in hindi

दरबार में आते ही ब्राह्मण महाराज के चरणों में गिर पड़ा और गिड़गिड़ाते हुए बोला, “महाराज, तेरह साल के बाद मेरे यहाँ एक लड़का हुआ, जो इस समय मौत से जूझ रहा है। एक तांत्रिक ने बताया है कि आपके सिंहासन के रत्नजड़ित मोर को अगर लड़के के माथे परएआ दिया जाए तो वह बच सकता है। आप अगर कृपा करें तो मेरे पुत्र की जान बच जाएगी और जीवन भर में आपका दास बनकर रहूँगा।”

ब्राह्मण की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि महाराज का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और वह गुस्से से चीखे, “अरे मूर्ख ब्राह्मण! यह रत्नजड़ित मोर हमारा राष्ट्रीय चिह्न है, इसके सम्मान को बचाने के लिए हमने कई लड़ाईयाँ लड़ी हैं। क्या तेरे पुत्र की जान देश के सम्मान से भी कीमती है? तू कुछ और माँग ले…”

राजा की बात बीच में ही काटते हुए ब्राह्मण तिलमिलाकर बोला, “महाराज! अगर मेरे बेटे की जान खतरे में न होती तो ऐसी माँग न करता। युवराज बेस्संतर को ही देख लीजिए। उनसे राष्ट्रीय चिह्न तो क्या, उनके प्राण भी माँग लें तो वह खुशी से दे देंगे। एक आप हैं.?” Motivational story in hindi

एकाएक राजा चौंका। ब्राह्मण की इस बात से जैसे अंधेरे में रोशनी दिखाई दी। राजा ने कुछ सोचा और कहा, “तुम्हारा पुत्र बच सकता है, अगर तुम हमारा एक काम कर दो।”

“क्या काम करना होगा महाराज ?” ब्राह्मण ने उत्सुकता से पूछा। वह बेटे के लिए कुछ भी करने को तैयार था।

आपने क्या सीखा –

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6 COMMENTS

  1. Inspresonal stories…👌👌

  2. बचपन की याद दिला दी भाई।।

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