PlasmaDisplay Panel kya hota hai(PDP) प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल क्या होता है-

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Plasma Display Panel kya hota hai(PDP) प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल क्या होता है-

प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल एक प्रकार का ऐसा फ्लैट पैनल है जो प्लाज्मा युक्त छोटी कोशिकाओं का उपयोग करता है।यह एक उत्सर्जक डिस्प्ले है।इससे यह सिद्ध होता है कि पैनल ही प्रकाश स्त्रोत है और इसका उपयोग ज्यादातर बहुत बड़े-बड़े डिस्प्ले बनाने में किया जाता है।PDP एक हल्के और सहन शील और उज्ज्वल तकनीक है जोकि यह गैस डिस्चार्ज सिद्धान्तों

 का उपयोग करती हैं गैस डिस्चार्ज सिद्धान्त का उपयोग करने के कारण इसको  गैस डिस्चार्ज डिस्प्ले के रूप में भी जाना जाता है।अगर आप लोग नही जानते हो कि Plasma Display Panel kya hota hai और इसके मुख्य भाग कौन-कौन से हैं

Plasma Display Panel in hindi –

दोस्तों क्या आप सभी को पता है कि प्लाज्मा डिस्प्ले क्या है।प्लाज्मा डिस्प्ले एक प्रकार का फ्लैट पैनल है जोकि यह प्लाज्मा का इस्तेमाल करता है और।Plasma एक प्रकार का electrically charged ionized gas होते हैं और यह प्लाज्मा एक साथ जलते हैं और जब भी डिस्प्ले पर आउटपुट शुरू करना होता है तब इसका इस्तेमाल बड़ी TV की डिस्प्ले में किया जाता है।इसकी लंबाई 30 इंच या उससे भी बड़ी होती है और प्लाज्मा डिस्प्ले पतली होती है प्लाज्मा एक्शन पैक्ड में स्पोर्ट्स देखने या वीडियो गेम खेलने में भी इसका उपयोग किया जाता है।

Plasma Display ke मुख्य भाग –

दोस्तो आज में आप सभी को बताऊंगा की प्लाज्मा डिस्प्ले के मुख्य भाग कौन -कौन से है-

कैथोड(ceathod)-

कैथोड में जो तार प्रयोग किये जाते हैं वे बहुत छोटे और महीन होते हैं जो गैस सेल को नेगेटिव वोल्टेज  भेजते हैं और इसे रखा भी नेगेटिव एक्सेस के साथ।

एनोड (Anode)-

एनोड जो होता है तो इसके अंदर लाइन वायर होते हैं और ये महीन होते हैं और ये पॉजिटिव वायर को रिलीज करते हैं।

Fluorescent cells –

फ्लोरोसेंट सेल में नियांन गैस लिक्विड फोरम होता है और इसमें छोटे छोटे पॉकिट बने होते हैं।जो लाइट उत्पन्न होती है तो पहले इसके लिए नियॉन गैस को लिक्विड को वोल्टेड भेजता है तब जाकर लाइट आती है और फिर हमें स्क्रीन पर दिखाई देती है। 

Glass Plates – 

यह गिलास प्लेट एक capacitor की तरह कार्य करता है और जब भी गिलास प्लेट को वोल्टेज भेजे  जाते हैं तो यह चमकने लगता है। इसमें गैस की तीव्रता बहुत धीमी होती है क्योंकि इसमें हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल के बीच ज्यादा अंदर होता है। पता है इसका वोल्टेज 90 से 120 के बीच होने चाहिए।

प्लाज्मा डिस्प्ले कैसे काम करता है-

प्लाज्मा डिस्प्ले जो होता है उसमें एक गिलास के दो प्लेटो के बीच लाखों की संख्या में छोटे- छोटे कंपार्टमेंट होते हैं। जिनको पिक्सेल कहा जाता है और इन कंपार्टमेंट का रंग Red,Blue,Green, और फॉस्फोरस से कार्डिया होते हैं। ये कंपार्टमेंट हीलियम, ऑर्गन,और न्यूआन गैसों से भरे होते हैं और इसके साथ इसके दिनों साइड  इलेक्ट्रोड की ग्रिड लगी होती है।जिनसे हर कंपार्टमेंट प्लाज्मा बल्ब की तरह काम करता है और जब इन कंपार्टमेंट को हाई वोल्टेज में अप्लाई किया जाता है तब जो कंपार्टमेंट में उपस्थित गैस होती है वह अल्ट्रा वॉयलेट लाइट में बदल जाती है फिर इसी तरह प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल में बने लाखों कंपार्टमेंट फिक्सेल का रूप ले लेते हैं।जिसको सिस्टमैटिकलीऑन ऑफ कहा जाता है। अब आपको पता चल गया होगा कि इस तरह से प्लाज्मा डिस्प्ले कार्य करता है।

Plasma Display Panel इस्तेमाल करने के Advantage –

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अभी आप सभी को नही पता होगा कि प्लाज्मा डिस्प्ले में कौन-कौन से Advantage इस्तेमाल किये जाते हैं तो चलिए जानते हैं-

1.सीआरटी (CRT) Display –

यह एक प्लाज्मा डिस्प्ले का प्रमुख भाग है  और इसमें के कैथोड – रे ट्युब या CRT  डिस्प्ले पर आधारित डिस्प्ले पर प्रति इंच फिक्सेल होता है और ये लाभ होते हैं वह विशिष्ट लाभ के अनुवाद के होते हैं जैसे तेज छवि।

2.सीआरटी से अधिक कम्पपेक्ट-

आप जानते हैं कि इन फायदों के अलावा सीआरटी की तुलना में प्लाज्मा के और भी फायदे होते हैं जो यह भारी और अधिक कॉम्पेक्ट होता है 

3. वाइड व्युइंग एंगल-

 आप जानते हो कि प्लाज्मा डिस्प्ले में जो काला रंग होता है उसका मतलब क्या होता है।कि इसमें CRT और LED व्यापक व्यूइंग एंगल होते हैं जो चरम कोणों पर देखे जाने पर एलसीडी में गिरावट का काम करते हैं और जो सीआर टी होता है वह गहरे काले रंग के उत्पादन नही करता है।

4. सुपीरियर एकरूपता-

सुपीरियर एकरूपता में जो एलसीडी होती है वह एलसीडी पैनल की बैकसाइड हमेशा असमान चमक स्तर उत्पन्न करती है और जो सीआर टी होती है वह आसमान स्तर के चमक से पीड़ित हो सकती है ।क्योंकि इसमें स्क्रीन का जो आकार होता है वह व्यापक होता है और जो पीडीपी होती है उसकी स्क्रीन पर एक समान की चमक होती है।

5.कम दिखाई देने वाले मोशन ब्लर –

इसमें अधिकांश प्लाज्मा डिस्प्ले होता है उसमें ताजा खबर और प्रतिकिया का समय समान होता है।इसमें भूत और धुंधलापन आसांनी से दिखाई नही देता है, इस प्रकार पीडीपी को उच्च गति वाले वीडियो गेम की वांछिनिय बनाता है।

6.रंग प्रदर्शन-

16.77 मिलियन प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल अपना रंग का प्रदर्शन करता है और यह उच्च संकल्प प्रदान करता है।प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल बेहद विपरीत होता है और यह  एच डीटीवी शिकायत संकेत प्रदर्शन करता है।

Plasma Display Panel इस्तेमाल करने के  Disadvantage –

अभी तक आपको बता रहे थे कि Advantage क्या और चलिए जानते हैं कि Disadvantage क्या -क्या होते हैं-

1.गिरावट की आशंका-

प्लाज्मा डिस्प्ले के सबसे महत्वपूर्ण नुकसान यह है कि वे स्क्रीन के बर्न और उनकी प्रतिधारणा से ग्रस्त होते हैं औऱ यह सीमा स्थिर छवियों को प्रदर्शित करने के लिए पीडीपी की बनाती है। जो पीडीपी वह पिछली पीढ़ियो की चमक में गिरावट से ग्रस्त है और इसी के फलस्वरूप ही इसकी चमक में धीरे-धीरे गिरावट आ जाती है।

2. झिलमिलाहट प्रभाव-

प्लाज्मा डिस्प्ले कुछ ऐसे होते हैं जो अपनी निर्माता की गुणवत्ता और मानको के आधार पर  विभिन्न रंगों और तीव्रता  या पैटर्न झिलमिलाहट से ग्रस्त होते हैं और इस धटना को उत्पादित होने वाले रंग की बस्टेबल कोप्रकृति और तीव्रता को पैदा करने की विधि को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

3. उच्च बिजली खपत-

क्या आप लोग जानते हो कि प्लाज्मा डिस्प्ले का एक नुकसान ओर भी यह ज्यादा बिजली कि खपत करता है और जो एलईडी औऱ बैकलाइट का उपयोग करते हैं वो एलसीडी के सापेक्ष अधिक बिजली की लागत उत्पन्न करते हैं।

4. अधिक मंहगा-

जानते की जो CRT होती है उसकी कीमत प्लाज्मा डिस्प्ले से अधिक होती है।और अधिकांश LCD की तुलना में थोड़ी अधिक होती है। और जो हाई-एंड एलसीडी होती है जो औसतन पीडीपी की तुलना में महंगे होते हैं।

5.एलसीडी और ओएलईडी की तुलना में भारी –

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दोस्तों क्या आप सभी को पता की जो प्लाज्म डिस्प्ले में सीआरटी होती है वह इसकी तुलना में अधिक कॉम्पैक्ट भौतिक प्रोफाइल होती है और ये LCD की तुलना में कुछ बड़े होते हैं।इसके ये OLED पैनल की तुलना में काफी हद तक अच्छे होते हैं और पीडीपी भी जो होई है वह आम तौर पर एलसीडी और ओएलईडी की तुलना में भारी होती हैं।

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