नाथूराम गोडसे जीवन परिचय जन्म मृत्यु।Nathuram Godse Biography in hindi-

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नाथूराम गोडसे जीवन परिचय जन्म मृत्यु।Nathuram Godse Biography in hindi-

नाथूराम गोडसे देशभक्ति  या आतंकवादी जीवन परिचय-(Nathuram Godse Biography in hindi)-

दोस्तों आज हम आप सभी को एक ऐसे देशभक्ति यानी कि आतंकवादी के बारे में ।तो चलिए जानते हैं कि नाथूराम गोडसे कौन हैं।इनका जन्म कहां हुआ और इन्होंने राष्ट पिता गांधी जी की हत्या क्यों कि थी।

 दोस्तों अगर आपको इस सभी के बारे में जानना है तो इस लेख आप अंत तक पढ़े जिससे आपको सभी के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।

Nathuram Godse Biography

जन्म और परिचय(Birth and Introduction)-

क्र. .    जीवन परिचय बिंदु
  1.पूरा नाम (Full Name)नाथूराम विनायक राव गोडसे 
  2.अन्य नाम (Other Name)रामचन्द्र एवं नाथूराम गोडसे
  3.    जन्म (Birth)  19 मई 1910
  4.जन्म स्थान (Birth Place)बारामती,जिला पूणे,बॉम्बे प्रेडेन्सी ,ब्रिटिश भारत 
  5.  मृत्यु (Death)15 नवंबर,1949
    6.   मृत्यु स्थान   (Death Place)   
         सजा का कारण 
       उम्र (Age)
        राष्टीयता (Nationality
        गृह नगर( Home Town)
        धर्म (Religion)
         जाति (Caste)
        पेशा (Profession)          समूह ( Organisation 
           Group)           राशि ( Zodiac Sign )                   प्रशिद्ध किताब(Famous                                Book)
अंबाला जेल,उत्तर पंजाब,भारत

  महात्मा गांधी की हत्या
     39 वर्ष
    भारतीय 
  बारामती,पुणे
    हिन्दू
   ब्राह्मण
   सामाजिक कार्यकर्ता
  राष्ट्रीय स्वयं सेवक  संघ एवं हिन्दू महासभा
  वर्षक 
    ‘व्हाय आई किल्ड गांधी’

नाथूराम गोडसे का परिवार एवं शुरुआती जीवन

Nathuram Godse Family and Early life)-

दोस्तों क्या आप सभी को पता है कि नाथूराम का जन्म कब और कहाँ हुआ है और इसके पिता का क्या नाम है।  तो चलिए जानते हैं।

नाथूराम का जन्म पुणे जिले के बारामती गाँव मे हुआ है।यह मराठी तथा हिन्दू परिवार से हैं।नाथूराम का जब जन्म हुआ था तब इनका नाम रामचन्द्र रखा गया था।इनका परिवार एक चित्पावन ब्राह्मण भी था। इसके पिता जो थे वे पोस्ट ऑफिस में कर्मचारी थे।इनकी माता का नाम लक्ष्मी गोडसे था जो कि गृहणी थी।इनकी माता का शादी से पहले नाम गोदावरी था शादी के बाद इसको लक्ष्मी कहा जाने लगा।नाथूराम तीन भाई और एक बहन थी इसके छोटे भाई का नाम गोपाल गोडसे था।

शिक्षा और  करियर (Education and career)-

नाथूराम अपनी प्राथमिक शिक्षा यानी कि पांचवी कक्षा तक पढ़ाई अपने स्थानीय स्कूल से ही कि थी और इनको किसी रिश्तेदार के साथ पुणे भेज दिया गया ताकि वे वहां हिंदी भाषा के साथ अंग्रेजी का भी ज्ञान हो।इस दौरान इनको गांधी जी के विचार ज्यादा पसंद थे।इसीलिए वे उनको अपना आदर्श मानने लगे थे।नाथूराम गोडसे एक शांत,बुद्धिमान, और आगे बढ़ने वाले सच्चे इंसान थे और इनके पिता की बदली 1930में रत्नागिरी में हो गई थी।तब वे अपने माता पिता के साथ रत्नागिरी में रहने चले गये और उसी दौरान उनकी मुलाकात हिंदुत्व के समर्थक से हुई जिनका नाम सावरवर था।फिर यही से इन्होंने राजनीति के और कदम बढ़ाने का फैसला किया।

राजनीति करियर(Political Career)-

नाथूराम जब हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे तब ही उन्हें सामाजिक कार्यो में जुड़ने की इच्छा थी तो वे अपनी पढ़ाई छोड़कर हिन्दू महासभा  एवं राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) जैसे समूह में एक कार्यकर्ता के रूप में जुड़ गए।वे मुश्किल लीग वाली अलगावादी राजनीति के विरोध में थे।क्या आपको पता है कि  उन्होंने एक हिन्दू महासभा समूह से जुड़ने के बाद इसके लिए एक समाचार पत्र का प्रकाशन किया था जोकि मराठी भाषा में था और इस समाचार पत्र का नाम अग्रणी था और इसे ही कुछ साल बाद हिन्दू ‘राष्ट’ नाम दे दिया था और एक बार गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया,जोकि एक अंहिसक और प्रतिरोधी आंदोलन था और इस आंदोलन में हिदू महासभा ने अपना समर्थन दिया था।फि बाद में इन्होंने इससे अलग होने का फैसला किया और गाँधी जी के विरोध में वे गए। क्योंकि गोडसे का कहना था कि गांधी जी हिंदुओ और अल्पसंख्यक समूहों( मुस्लिम लीग) में भेदभाव कर रहे हैं।अल्पसंख्यक समूह के लोगों को खुश करने के चक्कर में वे हिंदुओ को नजरअंदाज कर रहे हैं भारत और पाकिस्तान के विभाजन में गांधी जी को ही उन्होंने दोषी ठहराया। जिसमें हिंदुओ सहित हजारों लोगों की मृत्यु हुई थी।इसके चलते ही उन्होंने गांधी जी को मारने का फैसला किया था।

गांधी जी की हत्या (Gandhi’s Assassination)-

दोस्तों क्या आप सभी को पता है कि गांधी जी की मृत्यु कैसे हुई।तो चलिए जानते हैं। एक शाम जब गांधी जी रोज की तरह शाम की प्राथर्ना कर रहे थे।उसी समय शाम 5: 15 बजे गोडसे वहां जाकर सीधे गांधी जी के पास पहुचकर उनके सीने पर 3 गोलियां चला दी और उन्होंने जिस पिस्तौल से गोलियां चलाई वह बियरट्टा एम 1934 सेमी- ऑटोमेटिक पिस्तौल थी। इस घटना बाद गोडसे भागे नहीं वे अपनी जगह पर खडे होकर अपनी गिरफ्तारी दी।गोडसे के इस अपराध में उनके 6 साथी और भी शामिल थे।जिसमें नारायण आप्टे भी थे। जब तक गांधी जी को उनके कमरे तक ले जाए गया तब तक बहुत ही देर हो चुकी थी।क्योंकि वहाँ जाते ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

गांधी जी के हत्या के परिणाम-

गांधी जी के मृत्यु के बाद ही हिन्दू महासभा एवं राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ दोनों ही समूहों को उस वक्त अवैध घोषित कर दिया था।लेकिन उनकी हत्या का आरएसएस का कोई भी लेना देना नही था।इसलिए प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और उप मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल सन 1949 में आरएसएस पर लगा प्रतिबन्ध हटा दिया था। गांधी जी की मृत्यु के बाद देश मे दंगे शुरू हो गए और मुस्लिम और हिंदुओं के बीच मार मारी होने लगी।ब्राम्हणों के घर जला दिए जाते थे।बहुत से लोग भारत सरकार को भी गांधी जी की हत्या का दोषी मानते हुए उनकी आलोचना की।क्योंकि इनका कहना था कि गांधी जी को मारने की कोशिश पहले ही कि गई थी और तब सरकार ने उनके खिलाफ कोई  एक्शन क्यों नही लिया।

नाथूराम गोडसे की मृत्यु(Nathuram Godse Death)-

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महात्मा गांधी जी के मृत्यु के बाद 27 मई 1948 को इस केस की कार्यवाही शुरू की गई थी।उन्होंने कोर्ट को बिल्कुल सफाई नही दी और अपना गुनाह खुले तौर पर स्वीकार कर लिया की उन्होंने ही गांधी जी को मार है।परन्तु इस केस को अंतिम समय देना एक साल से भी ज्यादा लग गया था ।इस केस का अंतिम फैसला 8 नवम्बर 1949 को सुनाया गया था।जिसमें उन्हें 15 नवम्बर को फांसी की सजा सुनाई और इस अपराध में नारायण आप्टे पूरे पूरे भागीदार थे।इसलिए उनको भी फांसी दी गई।इसके अलावा हिन्दू महासभा के सदस्य सावरवर पर भी इस अपराध में शामिल होने  का आरोप लगा था। लेकिन बाद में खारिज कर दिया गया।और गोडसे ने यह फैसला किया की उनकी मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को जल में विसर्जित न किया जाए।बल्कि उनको तब तक ऐसे रखा जाए जब तक पाकिस्तान और भारत एक न हो जाये।वे चाहते थे कि उनकी अस्थियों का विसर्जन पाकिस्तान की  सिन्धु नदी में किया जाए।

 नाथूराम गोडसे ने गांधी जी को क्यों मारा ?( Why Nathuram Godse killed Mahatma Gandhi ji)-

जिस दिन उन्हें सजा सुनाई गई थी ठीक एक साल पहले उसी दिन गोडसे ने एक बयान दिया और वह बयान 90 पेज का था। उस बयान में उन्होंने साफ-साफ समझाया था कि उन्होंने गांधी जी की हत्या क्यों की।वे एक स्थान पर लगभग 5 धंटे खड़े होकर गाँधी जी के मारने के कारण की हर एक कि व्यख्या करते रहे,और उनके द्वारा किये गए इस अपराध का उनको बिल्कुल भी खेद नही था।तब उन्होंने इसके बारे में एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम व्हाय आई किल्ड गांधी, इसमें उन्होंने गाँधी जी के मारने को स्पष्ट रूप से लिखा था।किंतु उसके प्रकाशन पर रोक लगा दी गई।

नाथूराम गोडसे मंदिर (Nathuram Godse Temple)-

सन 2014 में नरेंद्र मोदी  जी के सत्ता में आने के बाद हिन्दू महासभा  ने नाथूराम  गोडसे को एक देशभक्ति का नाम देने का प्रयास शुरू किया।उन्होंने देशभक्त नाथूराम गोडसे नाम से एक डाक्यूमेंट्री नाम की फ़िल्म बनाई और उसे 30 जनवरी सन 2015 को गांधी जी की पुयतिथि वाले दिन रिलीज किया।गोडसे के समर्थकों ने उनकी मृत्यु के दिन को बलिदान दिवस नाम देने का प्रयास किया।यहां तक कि इस संगठन ने एमपी में इनका मंदिर भी बनवाना चाहा।परन्तु प्रकाशन की ना मंजूरी के बाद यह संभव ना हो सका।

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Editorial Team
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